Chemical Bonding
https://www.skstudypointsiliguri.com

Chemical Bonding क्या है ? तत्वों के परमाणु परस्पर संयोग कर अणु का निर्माण करते हैं। इस अणु में परमाणुओं के बीच एक आकर्षण बल कार्य करने लगता है जो इन परमाणुओं को एक साथ बाँधकर रखता है। यही आकर्षण बल Chemical Bonding कहलाता है।
और Chemical Bonding के कितने प्रकार हैं – के बारे में भी पूरी जानकारी पाने के लिए इस चैप्टर को जरूर पढ़ें । रासायनिक बंधन (Chemical Bonding ) पर आधारित प्रश्नोत्तर को पढ़िए जो परीक्षा में आते हैं। अतः यहाँ क्लिक करें।

Electrovalency

जब अपने निकटतम गैसों की स्थाई रचना प्राप्त करने के लिए दो या दो से अधिक परमाणु अपने सबसे बाहरी कक्ष में इलेक्ट्रॉनों का आदान प्रदान कर विपरीत आवेशित आयनों में परिणित होकर आपस में सहयोग करते हैं तो इस क्षमता को विद्युत संयोजकता या आयनिक संयोजकता कहते हैं ।

जैसे – सोडियम क्लोराइड का बनना

Electrovalent Compound (विद्युत संयोजी यौगिक)

दो या दो से अधिक  परमाणु इलेक्ट्रॉन त्याग या ग्रहण कर विपरीत आवेशित आयनों में परिणित होकर परस्पर विद्युत आकर्षण बल द्वारा संयुक्त होकर जिस योगी का गठन करते हैं उसे विद्युत संयोजी यौगिक कहते हैं।

 जैसे- सोडियम एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर सोडियम आयन और क्लोरीन एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण कर क्लोरीन आयन में परिणत हो जाता है तथा सोडियम आयन और क्लोरीन आयन परस्पर विद्युत आकर्षण बल द्वारा संयुक्त होकर NaCl यौगिक का गठन करते हैं। अतः NaCl एक विद्युत संयोजी योगिक है।

रासायनिक बंधन (Chemical Bonding ) पर NOTES:-

  • जब सोडियम(Na) धातु को क्लोरीन(Cl) गैस के साथ प्रतिक्रिया कराई जाती है तो अत्यंत तीव्रता के साथ प्रतिक्रिया संपन्न होती है जिसके फलस्वरूप सोडियम क्लोराइड(NaCl) का ठोस यौगिक बनता है। यह कैसे संभव होता है? यहां सोडियम(Na) का परमाणु अपने सबसे बाहरी कक्ष से एक इलेक्ट्रॉन का त्याग करके अपने निकटतम निष्क्रिय गैस नियान के समान स्थाई इलेक्ट्रॉन- विन्यास(2,8) की प्राप्ति करता है। सोडियम परमाणु द्वारा त्याग किए गए इलेक्ट्रॉन को क्लोरीन(Cl) परमाणु ग्रहण करके अपने निकटतम निष्क्रिय गैस ऑर्गन के समान स्थाई इलेक्ट्रॉन विन्यास (2,2,8 ) की प्राप्ति करता है। फलस्वरूप सोडियम आयन और क्लोरीन की सृष्टि होती है। विपरीत आवेश होने के कारण इन पर इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स(Electrostatic Force) कार्य करता है जिसके फलस्वरूप ये परस्पर आकर्षण बल का अनुभव करने लगते हैं और परस्पर संयुक्त होकर सोडियम क्लोराइड (NaCl) के अणु का गठन करते हैं। अतः NaCl एक विद्युत संयोजी यौगिक है।

  Na    +   Cl       →   Na+    +   Cl   →   [ Na – Cl ]    →   NaCl

(2,8,1)   (2,8,7)             (2,8)   (2,8,8)

  • धातु और अधातु परस्पर संयुक्त होकर विद्युत संयोजी बंध की सृष्टि करते हैं । अतः यदि किसी यौगिक को देखने पर ज्ञात हो कि उसमें एक परमाणु धातु का और दूसरा अधातु है तो हमें समझ लेना चाहिए कि वह यौगिक आयनिक यौगिक(Ionic Compound) या इलेक्ट्रोवेलेंट यौगिक(Electrovalent Compound) है।

 जैसे- NaCl, KCl, MgCl2, Na2O Al2O3, NaF, NaBr, NaI, KI, CaCl2, MgS, ZnCl2, ZnO, NaH, CaH2

  • विद्युत संयोजी यौगिक के गठन के समय जिस तत्व का परमाणु इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है उसे विद्युत धनात्मक तत्व (Electro-positive element)कहते हैं। सभी धातुएं विद्युत धनात्मक तत्व होते हैं।

जैसे- Na, K, Al, Mg, Ca, Zn

 [एकमात्र हाइड्रोजन ऐसा धातु है जो विद्युत धनात्मक होता है।]

  • विद्युत संयोजी यौगिक के गठन के समय जिस तत्व का परमाणु इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करता है उसे विद्युत ऋणात्मक तत्व(Electro-negative element) कहते हैं। साधारणतः अधातुएँ विद्युत ऋणात्मक तत्व होते हैं। जैसे- O, S, Cl, Br, I, N

Electrovalent Bond (विद्युत संयोजक बंधन)

विभिन्न परमाणु रसायनिक संयोग करते समय अपने सबसे बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉनों का आदान प्रदान कर दो परमाणु अपने सबसे बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉन का आदान प्रदान कर दोनों परमाणु अपने निकटवर्ती निष्क्रिय गैस की स्थाई रचना प्राप्त करते हैं । इस प्रकार बने योगिक में परमाणुओं के बीच जो बंधन बनता है उसे विद्युत संयोजक बंधन कहते हैं।

सोडियम क्लोराइड के अणु का गठन-

सोडियम और क्लोरीन परमाणु के रसायनिक संयोग के फलस्वरुप सोडियम क्लोराइड अनु का गठन होता है। नीचे इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की सहायता से सोडियम और क्लोरीन परमाणुओं के मध्य इलेक्ट्रॉन के आदान-प्रदान के फलस्वरुप इनके आयन में बदलने और प्रतिक्रिया के स्वरूप को चित्र के माध्यम से प्रदर्शित किया जा रहा है।

जब सोडियम(Na), क्लोरीन(Cl) से प्रतिक्रिया करता है तो सोडियम एक इलेक्ट्रॉन अपनी बाहरी कक्षा से क्लोरीन की बाहरी कक्षा में स्थानांतरित कर देता है। इस प्रकार सोडियम अपने निकटतम निष्क्रिय गैस नियान( 2,8) तथा क्लोरीन अपने निकटतम निष्क्रिय गैस ऑर्गन (2,2,8) रचना प्राप्त करते हैं और उनके बीच विद्युत संयोजी बंध की स्थापना होती है।

सोडियम परमाणु और क्लोरीन परमाणु के सहयोग से सोडियम क्लोराइड का बनना डॉट स्ट्रक्चर द्वारा निम्न रूप से दिखाया जा सकता है:-

Sodium Chloride
Chemical Bonding in Sodium Chloride

मैग्निशियम ऑक्साइड के अणु का गठन-

मैग्निशियम परमाणु अपने सबसे बाहरी कक्ष के दो इलेक्ट्रॉन का त्याग करता है जिससे वह नियोन का इलेक्ट्रॉन विन्यास प्राप्त करके मैग्नेशियम आयन में परिणत हो जाता है। ऑक्सीजन परमाणु इन दोनों इलेक्ट्रॉनों को ग्रहण करके नियान(Ne) के समान स्थायित्व प्राप्त करके ऑक्सीजन आयन में परिणत हो जाता है। दोनों विपरीत आयन मैग्निशियम आयन और ऑक्सीजन आयन परस्पर विद्युत-आकर्षण बल द्वारा विद्युत संयोजी बंधन के रूप में एक विद्युत संयोजी यौगिक मैग्निशियम ऑक्साइड का गठन करते हैं।

मैग्निशियम ऑक्साइड की संरचना को लेविस-डॉट-स्ट्रक्चर के द्वारा प्रदर्शित निम्न रूप से किया जा सकता है-

Magnesiun Oxide
Chemical Bonding in MAGNESIUM CHLORIDE

Covalency (सह-संयोजकता)

निकटतम निष्क्रिय गैस की रचना प्राप्त करने की चेष्टा में दो समान या विभिन्न परमाणुओं के द्वारा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों के जोड़ों का साझा कर दो परमाणुओं के संयुक्त हो जाने की क्षमता को सह-संयोजकता कहते हैं।

जैसे- नाइट्रोजन अणु का बनना।

Covalent Compound (सह-संयोजी यौगिक)

निकटतम निष्क्रिय गैसों की रचना प्राप्त करने की चेष्टा में दो या दो से अधिक परमाणु परस्पर एक या एक से अधिक इलेक्ट्रॉनों के जोड़ों के समान रूप से व्यवहार कर एक साथ संयुक्त होकर जिस योगी का गठन करते हैं उसे सह-संयोजी यौगिक कहते हैं ।

जैसे – हाइड्रोजन परमाणु तथा क्लोरीन परमाणु अपने एक-एक इलेक्ट्रॉनों का साझा कर इस इलेक्ट्रॉन के जोड़ों को समान रूप से व्यवहार कर HCl अनु का गठन करते हैं और HCl एक संयोजी यौगिक हुआ।

अन्य संयोजी यौगिक के अन्य उदाहरण :-

हाइड्रोजन, नाइट्रोजन, ऑक्सीजन, क्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन, आयोडीन आदि में दो समान परमाणु संयोजी बंधन (covalent bond) द्वारा परस्पर संयुक्त होते हैं। HF, HCl, HBr, HI, H2S NH3, PH3, CH4 , C2H2, C2H6, C2H2, CCl4, CS2, CHCl3, CO2 आदि में सह- संयोजकता(Covalency)पाई जाती हैं अर्थात जिनके परमाणुओं में सह-संयोज्य बंधन(covalent bond)पाया जाता है।

Covalent Bond(सहसंयोजक बंधन)

रसायनिक संयोग के समय दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी के कारण उनके बीच उत्पन्न होने वाले बंधन को सहसंयोजक बंधन कहते हैं ।

रसायनिक संयोग के समय दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों की आपसी साझेदारी के कारण उनके बीच उत्पन्न होने वाले बंधन को सहसंयोजक बंधन कहते हैं ।

नोट-  अधातु तत्व के परमाणु संयोजी बंधन की सृष्टि करते हैं।

Related Topics:-

  1. Current Electricity | Madhyamik Physical Science|
  2. Mathematics Theorems| Madhyamik Theorems| WB Board Class 10

सह संयोजकता बंधन के प्रकार-

साझेदारी में भाग लेने वाले इलेक्ट्रॉनों की जोड़ों की संख्या के आधार पर संयोजी बंध निम्न तीन प्रकार के होते हैं:-

1. एकल बंधन(Single Covalent bond)- दो परमाणु के मध्य एक जोड़ी इलेक्ट्रॉन की साझेदारी के फलस्वरुप उनमें एकल बंधन की सृष्टि होती है। इसे ‘-‘ अर्थात एक सीधी लकीर के द्वारा व्यक्त करते हैं। एकल बंधन द्वारा जुड़े दो परमाणुओं में से प्रत्येक की संयोजकता का मान एक (1) होता है।

2. द्वि-बन्धन(Double Covalent bond) -दो परमाणु के मध्य एक जोड़ी इलेक्ट्रॉन की साझेदारी के फलस्वरुप उनमें द्वि-बंधन की सृष्टि होती है। इसे ‘=’ अर्थात दो समानांतर सीधी लकीर के द्वारा व्यक्त करते हैं। द्वि-बंधन द्वारा जुड़े दो परमाणुओं में से प्रत्येक की संयोजकता का मान एक (2) होता है।

3. त्रिबंधन(Triple covalent)- प्रतिक्रिया में भाग लेने वाले दो परमाणुओं में प्रत्येक परमाणु में से तीन तीन इलेक्ट्रॉन आकर इलेक्ट्रॉन के 3 जोड़े का गठन करें तो इसके फलस्वरूप उन परमाणुओं के मध्य त्रिबंधन की सृष्टि होती है । तीन जोड़ी इलेक्ट्रॉन का अर्थ 6 इलेक्ट्रॉनों से है ।अतः हम कह सकते हैं कि 6 इलेक्ट्रॉन की पारस्परिक साझेदारी के साझेदारी के फलस्वरूप त्रि-बंधन की सृष्टि होती है। इसमें युक्त प्रत्येक परमाणु की संयोजकता तीन होती है।

हाइड्रोजन अणु का गठन:-

हाइड्रोजन परमाणु में केवल एक कक्ष होता है जिसमें एक इलेक्ट्रॉन रहता है। हाइड्रोजन-अणु के गठन के समय प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु अपने-अपने इलेक्ट्रॉन को देकर इलेक्ट्रॉन के एक साझे जोड़े का निर्माण करके हाइड्रोजन के एक अणु का गठन करते हैं। इस प्रकार प्रत्येक हाइड्रोजन परमाणु अपना द्वैत (duplet) करके अपने निकटतम निष्क्रिय तत्व हिलियम(He) के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को प्राप्त करते हैं। इलेक्ट्रॉन के एक साझे जोड़े का निर्माण करने के कारण हाइड्रोजन की संयोजकता एक होती है।

HYDROGEN
CHEMICAL BONDING IN HYDROGEN

जल के अणु का गठन-

ऑक्सीजन(O) परमाणु के अंतिम कक्ष में कुल 6 इलेक्ट्रॉन होते हैं। अतः निष्क्रिय तत्व नियान(Ne) के स्थाई आदर्श रचना की प्राप्ति के लिए ऑक्सीजन परमाणु को और दो इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता रहती हैं। इस कारण हाइड्रोजन के दो परमाणु द्वारा हाइड्रोजन के एक परमाणु के साथ पृथक पृथक रूप में एक- एक इलेक्ट्रॉन की साझेदारी के फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन जोड़ों की संख्या 2 हो जाती है। इलेक्ट्रॉन के दोनों जोड़ों का समान अधिकार से व्यवहार करते हुए प्रत्येक ऑक्सीजन-परमाणु निकटवर्ती निष्क्रिय तत्व नियान(Ne) तथा हाइड्रोजन-परमाणु अपने निकटवर्ती निष्क्रिय तत्व ऑर्गन(Ar) के इलेक्ट्रॉन-विन्यास को धारण करके स्थायित्व की प्राप्ति करते हैं जिसके फलस्वरूप जल अणु उत्पन्न होता है।

Water
Chemical Bonding in Water

अमोनिया अणु का गठन-

नाइट्रोजन परमाणु के अंतिम कक्ष में 5 इलेक्ट्रॉन रहते हैं। निष्क्रिय गैस की आदर्श स्थाई रचना प्राप्त करने के लिए नाइट्रोजन परमाणु को और तीन(3) इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता रहती है। इसलिए नाइट्रोजन परमाणु का तीन(3) इलेक्ट्रॉन, तीन(3) हाइड्रोजन परमाणुओं के तीन(3) इलेक्ट्रॉन के साथ मिलकर पृथक रूप से तीन(3) इलेक्ट्रॉन जोड़ी की सृष्टि करते हैं। इलेक्ट्रॉन के उत्पन्न जोड़ों के द्वारा नाइट्रोजन परमाणु 3 हाइड्रोजन परमाणुओं से एकल संयोजी बंध(Single Covant Bond) के द्वारा जुड़ जाता है और अमोनिया के एक अणु को उत्पन्न करता है।

AMMONIA
Chemical Bonding in Ammonia

अमोनिया के बनने में नाइट्रोजन परमाणु अपने सबसे बाहरी कक्ष में 8(5 अपना और 3 इलेक्ट्रॉन साझे का)  की पूर्ति करके अपने निकटतम निष्क्रिय तत्व के इलेक्ट्रॉन- विन्यास को प्राप्त करता है और प्रत्येक हाइड्रोजन-परमाणु हीलियम की रचना को प्राप्त करते हैं। एक नाइट्रोजन-परमाणु के साथ तीन हाइड्रोजन-परमाणुओं के संयुक्त होने के फलस्वरूप अमोनिया का गठन होता है। तीन इलेक्ट्रॉन जोड़ा गठित करने के कारण नाइट्रोजन की संयोजकता तीन होती है।

Characteristics of Electrovalent Compound :-

विद्युत संयोजी यौगिकों की विशेषताएँ :-

  1. यह प्रायः रवेदार(crystalline) होते हैं तथा रवे ठोस, कठोर तथा भंगूर होते हैं।
  2.  इनका जलीय घोल विद्युत का सुचालक होता है अर्थात ये विद्युत विच्छेद होते हैं लेकिन ठोस अवस्था में ये विद्युत का कुचालक होते हैं।
  3. इनका गलनांक तथा क्वथनांक उच्च होता है।
  4.  यह प्रायः जल में घुलनशील होते हैं लेकिन कार्बनिक गुणों में घुलनशील होते हैं।
  5.  यह ध्रूवीय(Polar) होते हैं अर्थात यौगिक का प्रत्येक अणु छोटे-छोटे चुंबक की भांति व्यवहार करता है।
  6.  इनमें समावयवता(Isomerism) का गुण नहीं पाया जाता है अर्थात प्रत्येक यौगिक का एक निश्चित सूत्र होता है।
  7. इन यौगिकों के बंध(Bond) की निश्चित दिशा नहीं होती है।

Characteristics of Covalent Compound :-

सह-संयोजी यौगिकों की विशेषताएँ :-

  1. साधारण तापक्रम पर अधिकांश सह-संयोजी (सह-संयोज्य)यौगिक तरल या गैस अवस्था में पाए जाते हैं। अधिक परमाणु भार वाले संयोजी यौगिक ठोस अवस्था में भी पाए जाते हैं।
  2. ये जल में घुलनशील तथा कार्बनिक यौगिकों में घुलनशील होते हैं।
  3. ये विद्युत का कुचालक होते हैं तथा इनका घोल विद्युत अविश्लेष्य(no -electrolyte) होता है अर्थात घोल में इन यौगिकों का आयनीकरण नहीं होता है।
  4.  इनके अणु स्थाई(Stable) होते हैं क्योंकि सह-संयोजी बंध शीघ्र नहीं टूटते हैं।
  5. इनका गलनांक तथा क्वथनांक कम होता है।
  6. ये दैशिक बंध द्वारा जुड़े रहते हैं। प्रत्येक परमाणु के लिए बंध की दिशा अलग-अलग होती है अर्थात दो बंधो (bonds) के बीच एक निश्चित कोण होता है।
  7. इनके अणु अध्रुवीय (non-polar) होते हैं।

विद्युत संयोजी तथा सह-संयोजी यौगिकों में अंतर

Difference Between Electrovalent & Covalent Compounds-

                      विद्युत संयोजी

1. यह साधारण तापक्रम पर रवादार ठोस होते हैं।

2. इनका गलनांक तथा क्वथनांक अधिक होता है।

3.  यह प्रायः जल में घुलनशील होते हैं।

4. इनका जलीय घोल विद्युत का सुचालक अर्थात विद्युत विच्छेद्य होता है।

5. इनके अणु ध्रुवीय(Polar) होते हैं।

6. इनमें समावयवता का गुण नहीं पाया जाता है।

7. इनका बंध कमजोर तथा बंध की दिशा निश्चित नहीं होती है।

                सह-संयोजी यौगिक

1. यह साधारण तापक्रम पर द्रव या ठोस अवस्था में रहते हैं।

2.  इनका गलनांक तथा क्वथनांक कम होता है।

 3. यह जल में घुलनशील तथा कार्बनिक यौगिकों में घुलनशील होते हैं।

4. इनका घोल विद्युत का कुचालक अर्थात विद्युत अविच्छेद्य(non-electrolyte) होता है।

5. इनके अणु अध्रुवीय(non-polar) होते हैं।

6. इनमें समावयवता का गुण पाया जाता है।

7. इनका बंध मजबूत तथा एक निश्चित दिशा में होता है।

RATE US
5/5

Lewis Structure या Electron-dot-notation (Symbol) के लिए कुछ तथ्य को समझ लें :-

  • परमाणु की इलेक्ट्रॉनिक गठन के लिए वैज्ञानिक लेविस ( G. N. Lewis) और कोसेल(W. Kossel)) ने संयोजकता का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत का प्रतिपादन किया था।
  • परमाणुओं के सबसे बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉनों को बिंदु या डॉट(.) के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
  • तत्व का संकेत लिखकर उसके चारों तरफ उतने डॉट बैठा देते हैं जितने उसके परमाणु के सबसे बाहरी कक्ष में इलेक्ट्रॉन की संख्या होती है ।
  • इस रचना को जी.एन. लेविस (G.N. Lewis) के नाम पर लेविस स्ट्रक्चर(Lewis Structure)) या डाट-संरचना (dot -structure) या इलेक्ट्रॉन डॉट नोटेशन [ Electron-dot-notation (Symbol) ] कहते हैं।

संयोजकता का इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत -

परमाणु की इलेक्ट्रॉनिक गठन के आधार पर सन 1916 ईस्वी में वैज्ञानिक लेविस और कोसेल ने संयोजकता के इलेक्ट्रॉनिक सिद्धांत का प्रतिपादन किया इस सिद्धांत के प्रमुख तथ्य निम्नलिखित हैं-

  1. किसी एक ही या भिन्न तत्वों के दो परमाणु जब परस्पर रसायनिक संयोग करते हैं तो इस संयोग में दोनों परमाणु अंश ग्रहण करते हैं फल स्वरुप दोनों परमाणुओं के सबसे बाहरी कक्ष के इलेक्ट्रॉन की स्वाभाविक स्थिति में परिवर्तन होता है जिसके अंतर्गत प्रत्येक परमाणु अपने निकटवर्ती निष्क्रिय तत्व की अवस्था को धारण करने का प्रयास करता है।
  2. परमाणु के सबसे बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉन रासायनिक प्रतिक्रिया में भाग लेते हैं और रासायनिक बंधन में सहायता करते हैं इसीलिए परमाणु के सबसे बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉनों को संयोजी इलेक्ट्रॉन कहते हैं इलेक्ट्रॉनों की यही संख्या उस तत्व की संयोजकता को प्रदर्शित करती है इसीलिए परमाणु के सबसे बाहरी कक्ष को संयोजकता कक्ष कहा जाता है।
  3. प्रत्येक परमाणु में अपने निकटतम निष्क्रिय गैस के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को प्राप्त करने की प्रबल प्रवृत्ति पाई जाती है। इसके फलस्वरूप एक परमाणु में अन्य परमाणुओं के साथ संयुक्त होने की क्षमता अर्थात उनमें पारस्परिक आकर्षण की सृष्टि होती है। अर्थात प्रत्येक परमाणु निष्क्रिय गैसों की भांति स्थाई अवस्था में आने की चेष्टा करता है जिसके फलस्वरूप संयोजकता की सृष्टि होती है।

नोट-  Helium(He), Neon(Ne), Argan(Ar), Krypton(Kr), Xenon(Xe) और Radon(Rn) – ये 6 निष्क्रिय या आदर्श या अविरल गैसे हैं जो साधारण रूप में रासायनिक प्रतिक्रिया में भाग नहीं लेती हैं और इनका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास स्थाई और सुस्थित है। इनमें से केवल हीलियम के बाहरी कक्ष में 2 इलेक्ट्रॉन है अन्य सभी पांचों गैसों – Neon(Ne), Argan(Ar), Krypton(Kr), Xenon(Xe) और Radon(Rn) -के बाहरी कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन पाए जाते हैं।

अष्टक नियम (Octet Rule / Rule Of Octet)-

रासायनिक संयोग के माध्यम से रासायनिक प्रतिक्रिया के समय प्रत्येक परमाणु अपने सबसे बाहरी कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन की पूर्ति करके अपने निकटतम निष्क्रिय गैस की अवस्था को प्राप्त करने की चेष्टा करता है, इसे परमाणु का ‘अष्टक’ पूर्ण करना कहते हैं। अष्टक नियम के अनुसार प्रत्येक परमाणु (हाइड्रोजन, हिलियम, लिथियम, बेरिलियम और बोरान) को छोड़कर में रसायनिक संयोग करने की क्षमता के पीछे उनमें अपना-अपना आज तक पूर्ण करके स्थायीत्व (Stability) प्राप्त करने की चेष्टा होती है।

द्वैत-नियम (Rule Of Duplet)-

आवर्त सारणी में हिलियम और इसके आसपास स्थित कुछ तत्व जैसे- हाइड्रोजन, लिथियम, बेरिलियम और बोरन- रसायनिक संयोग करते समय अपने सर्ववहिस्थ कक्ष (सबसे बाहरी कक्ष) में दो इलेक्ट्रॉन की पूर्ति करके निष्क्रिय तत्व के परमाणु की भांति आदर्श स्थायी रचना की प्राप्ति करते हैं। किसी परमाणु का अपने सबसे बाहर वाले कक्ष में दो इलेक्ट्रॉन रखने की चेष्टा को द्वैत नियम कहते हैं।

Learn Important Questions on Chemical Bonding:-

1. सोडियम को क्लोरीन के साथ रासायनिक रूप से मिलाने पर किस प्रकार की संयोजकता दिखाई देती है?

– सोडियम जब क्लोरीन से रसायनिक संयोग करता है तो विद्युत संयोजकता (Elevtrovalency) की उत्पत्ति होती है।

2. दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉनों के बंटवारे के कारण किस प्रकार की वैधता को परिणाम कहा जाता है?

दो परमाणुओं के बीच इलेक्ट्रॉन की साझेदारी से संयोजकता (Covalency) की उत्पत्ति होती है।

3. किस यौगिक में से कौन सा यौगिक आइसोमेरिज्म का प्रतिनिधित्व करता है – इलेक्ट्रोवेलेंट (Electrovalent) या सहसंयोजक (covalent)?

– सह- संयोजी यौगिकों (Covalent) का में समावयवता का गुण पाया जाता है।

4. किस प्रकार के यौगिकों में गलनांक अधिक होता है- सहसंयोजक(Covalency) या विद्युतीय (Electrovalent/ ionic)?

-विद्युत संयोजी (Elextrovalent) यौगिकों का गलनांक (melting point) होता है।

5. किस प्रकार के यौगिक पानी में आसानी से घुलनशील होते हैं – सहसंयोजक(Covalency) या विद्युतीय (Electrovalent/ ionic)?

-विद्युत संयोजी (Elextrovalent) यौगिक जल में घुलनशील होते हैं।

Mathyamik Physical Science

6. किस प्रकार के यौगिक आमतौर पर इलेक्ट्रोलाइट के रूप करते में कार्य हैं – इलेक्ट्रोवेलेंट या सहसंयोजक?

Electrovalent Compound (विद्युत संयोजी यौगिक )

7. क्या पानी इलेक्ट्रोवेलेंट और सहसंयोजक है?

Covalent Compound (विद्युत संयोजी यौगिक )

8. आमतौर पर क्रिस्टलीय अवस्था में किस प्रकार के यौगिक पाए जाते हैं?

Electrovalent Compound (विद्युत संयोजी यौगिक )

9. किस प्रकार के यौगिकों को ध्रुवीय यौगिकों के रूप में भी जाना जाता है?

– Electrovalency (विद्युत संयोजकता)

10. एक परमाणु से दूसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉनों के स्थानांतरण के कारण उस क्षेत्र को किस प्रकार की संयोजकता कहा जाता है?

– Electrovalency (विद्युत संयोजकता)

11. दैनिक जीवन में उपयोग किए जाने वाले दो पदार्थों के नाम बताइए जिनमें से एक सहसंयोजक है और दूसरा एक विद्युतीय यौगिक है।

–  दैनिक जीवन में उपयोगी Covalent Compound जल है और दैनिक जीवन में उपयोगी  Electrovalent Compound साधारण नमक(NaCl) है।

12. इलेक्ट्रोवलेंट और सहसंयोजक यौगिकों के बीच कौन इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं?

– विद्युत संयोजी यौगिक(Electrovalent Compounds) एक विद्युत अपघट्य(Electolyte) होते हैं।

13. एक सहसंयोजक यौगिक का नाम बताइए जो पानी की उपस्थिति में आयनित हो जाता है।

 – Hydrochloric acid एक जल की उपस्थिति में आयन में बदल जाता है अर्थात आयनाइज्ड(ionised) हो जाता है।

14. सोडियम परमाणु और सोडियम आयन में कौन अधिक स्थाई है और क्यों?

– सोडियम परमाणु के सबसे बाहरी कक्ष में एक इलेक्ट्रॉन होता है जबकि सोडियम आयन के बाहरी कक्ष में 8 इलेक्ट्रॉन होता है। अतः उसका बाहरी कक्ष पूर्ण होता है और यह निष्क्रिय गैस की संरचना प्राप्त कर लेते हैं। फलस्वरुप सोडियम आयन अधिक स्थाई होता है।

15. ठोस सोडियम क्लोराइड में विद्युत धारा का प्रवाह हो सकता है या नहीं? कारण सहित उत्तर लिखिए।

– ठोस सोडियम क्लोराइड(NaCl) में विद्युत धारा का प्रवाह नहीं होता है क्योंकि विद्युत विच्छेदन के लिए पदार्थ को घोल की अवस्था या पिघली अवस्था में अवस्था में होना चाहिए।

16. Lewis का CO2 का DOT चित्र दिखाओ।

O::C::O

17. नाइट्रोजन और कैल्शियम ऑक्साइड में कौन संयोजी है और क्यों?

– नाइट्रोजन (N2) एक सह-संयोजी है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन की साझेदारी द्वारा उत्पन्न होता है जबकि कैल्शियम ऑक्साइड(CaO) एक विद्युत संयोजी है क्योंकि यह इलेक्ट्रॉन के स्थानांतरण के द्वारा उत्पन्न होता है।

18. एक परमाणु की एलेक्ट्रोवालेन्सी कैसे मापी जाती है?

– आयनिक यौगिक के निर्माण के दौरान एक परमाणु द्वारा प्राप्त या छोड़े गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या को उस परमाणु के एलेक्ट्रोवालेन्सी (electrovalency) के रूप में मापा जाता है।

19. सहसंयोजकता(Covalency) एक सहसंयोजक यौगिक(Covalent compound) में कैसे मापा जाता है?

– सहसंयोजक अणु के निर्माण के दौरान एक तत्व के परमाणु द्वारा गठित इलेक्ट्रॉन जोड़े की संख्या इसकी सहसंयोजक होती है।

#1 सोडियम क्लोराइड विद्युत संयोजी यौगिक है जबकि कार्बन टेट्राक्लोराइड सह-संयोजी यौगिक है । व्याख्या कीजिए।
सोडियम क्लोराइड विद्युत संयोजी यौगिक है -

सोडियम और क्लोरीन की रासायनिक प्रतिक्रिया से सोडियम क्लोराइड का गठन होता है। प्रतिक्रिया के समय सोडियम परमाणु के बाहरी कक्ष का एक इलेक्ट्रॉन निकलकर क्लोरीन परमाणु के बाहरी कक्ष में चला जाता है और दोनों परमाणु अपने-अपने निकटतम निष्क्रिय गैस का इलेक्ट्रॉन विन्यास प्राप्त कर लेते हैं। इस प्रक्रिया में सोडियम परमाणु पर विद्युत धनात्मक आवेश और क्लोरीन परमाणु पर विद्युत ऋणात्मक आवेश की सृष्टि होती हैं। विपरीत आवेश से आवेशित होने के कारण दोनों परमाणु विद्युतीय बल द्वारा संयुक्त हो जाते हैं। इस प्रकार विद्युत संयोजकता द्वारा सोडियम क्लोराइड के एक अणु तैयार हो जाता है। अतः सोडियम क्लोराइड विद्युत संयोजी यौगिक है।

Sodium Chloride
Sodium Chloride
कार्बन टेट्राक्लोराइड सह-संयोजी यौगिक है-

 कार्बन और क्लोरीन की रासायनिक प्रतिक्रिया से कार्बन टेट्राक्लोराइड का गठन होता है। इस प्रतिक्रिया में कार्बन के एक अणु क्लोरीन के परमाणु की साझेदारी द्वारा संयुक्त होते हैं और यह अपने अपने निकटतम निष्क्रिय गैस का ग्रहण कर लेते हैं। इस प्रकार सह-संयोजकता द्वारा कार्बन टेट्राक्लोराइड का एक अणु तैयार होता है। अतः कार्बन टेट्राक्लोराइड एक सह-संयोजी यौगिक है।

Carbon Tetrachloride
Chemical Bonding in Carbon Tetrachloride
#2 किस प्रकार के रासायनिक बंधनों से सोडियम क्लोराइड और हाइड्रोजन क्लोराइड गठन करने के लिए सोडियम हाइड्रोजन के साथ पृथक रूप से क्लोरीन संयुक्त होता है? दोनों ही स्थितियों में इलेक्ट्रॉन डॉट रचना अंकित करते हुए समझाओ।

– सोडियम क्लोराइड गठन करने के लिए क्लोरीन सोडियम के साथ विद्युत संयोजी बंधन (Electrovalent Bond)  द्वारा संयुक्त होता है।

सोडियम क्लोराइड की इलेक्ट्रॉन डॉट संरचना-

Sodium Chloride
Chemical Bonding in Sodium Chloride

हाइड्रोजन क्लोराइड के गठन में क्लोरीन सा संयोजी बंधन द्वारा संयुक्त होता है।

हाइड्रोजन क्लोराइड की इलेक्ट्रॉनिक संरचना-

Hydrochloric Acid
Chemical Bonding in Hydrogen Chloride
#3 Electron-dot संरचना द्वारा दिखाओ की कैल्शियम ऑक्साइड में सह संयोजी बंधन बनता है या विद्युत संयोजी बंधन ? (कैल्शियम की परमाणु संख्या 20 और ऑक्सीजन की परमाणु संख्या 8 है। )

कैल्शियम (20Ca40)का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास= 2,8,2

ऑक्सीजन(8O16) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास= 2,6

रासायनिक प्रतिक्रिया के समय एक कैल्शियम परमाणु अपने अंतिम कक्ष में स्थित दोनों इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन परमाणु को दान कर देते हैं। दो इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने के फलस्वरुप  ऑक्सीजन परमाणु नियॉन(Ne) के अनुरूप इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (2,8) को प्राप्त करके ऑक्सीजन आयन में बदल जाता है। दो इलेक्ट्रॉन का त्याग किए जाने के फलस्वरूप कैल्शियम आयन ऑर्गन(Ar) के सदृश्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास( 2,8) को प्राप्त करके कैल्शियम आयन में परिणित हो जाता है ।[ इससे दोनों परमाणु के अष्टक(Octet) पूर्ण हो जाते हैं।]

इस प्रकार प्रतिक्रिया से उत्पन्न धनायन(Ca++) और ऋणायन (O) स्थित विद्युतीय आकर्षण बल (इलेक्ट्रोस्टेटिक फोर्स) के प्रभाव से परस्पर संयुक्त होकर  के एक अणु की सृष्टि करते हैं । अतः इनके बीच विद्युत संयोजी(Electrovalent) बंधन बनता है।

Chemical Bonding in Calcium Oxide
#4 निम्नलिखित में से कौन-सा यौगिक - विद्युतीय है और कौन-सा सहसंयोजक? उत्तर की व्याख्या करो। - कैल्शियम ऑक्साइड, नाइट्रोजन अणु, क्लोरोफॉर्म, पोटेशियम ब्रोमाइड।

calcium  oxide- यह विद्युत संयोजी यौगिक है क्योंकि इसके बनने में इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण होता है यहां कैल्शियम के एक परमाणु से दो इलेक्ट्रॉन ऑक्सीजन के एक परमाणु पर स्थानांतरित होता है।

Nitrogen molecule-यह एक सह- संयोजी यौगिक है क्योंकि अणु बनते समय नाइट्रोजन के दो परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन परस्पर साझेदारी करते हैं ।

Chloroform- यह सह- संयोजी यौगिक है क्योंकि इसके बनने में परमाणुओं के इलेक्ट्रॉन साझेदारी करते हैं यहां कार्बन के 1 परमाणु के इलेक्ट्रॉन हाइड्रोजन के एक परमाणु तथा क्लोरीन के 3 परमाणु के इलेक्ट्रॉन के साथ साझेदारी करते हैं।

Potassium Bromide –यह विद्युत संयोजी यौगिक है क्योंकि इसके बनने में इलेक्ट्रॉन का स्थानांतरण होता है यहां पोटेशियम के एक परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक एक परमाणु पर स्थानांतरित होता है।

#5 सोडियम क्लोराइड और कार्बन टेट्राक्लोराइड के गुणों में दो अंतर लिखो।

सोडियम क्लोराइड(NaCl) और कार्बन टेट्राक्लोराइड(CCl4) के गुणों में दो अंतर –

  1.  विद्युत संयोजी यौगिक सोडियम क्लोराइड सोडियम आयन और क्लोरीन आयन द्वारा गठित होता है। इसके रवा में भी आयनो का अस्तित्व बना रहता है जबकि सा संयोजी यौगिक कार्बन टेट्राक्लोराइड में कोई आयन उपस्थित नहीं होता है । यह प्राकृतिक अणु CCl4 के रूप में घटित होता है।
  2. सोडियम क्लोराइड विद्युत-विश्लेष्य पदार्थ है। जल में घुलकर या पिघली अवस्था में विच्छेदित होकर आयन उत्पन्न करता है और आवेश का परिवहन करता है जबकि कार्बन टेट्राक्लोराइड एक विद्युत-अविश्लेष्य पदार्थ है। किसी भी अवस्था में यह आयन उत्पन्न करने में असफल रहता है, फलस्वरुप यह विद्युत आवेश का परिवहन करने में असमर्थ होता है।

Related Topics:

    1. Current Electricity | Madhyamik Physical Science|
    2.  Chemical Bonding| Madhyamik Physical Science|
    3.  Electricity And Chemical Reaction| Madhyamik Physical Science| 
    4. PERIODIC TABLE | Madhyamik Physical Science|WBBSE CLASS 10    
#6 NaCl और CHCl3 में से कौन सा AgNO3 के साथ प्रतिक्रिया करके एक सफेद अवक्षेप का निर्माण करेगा?

NaCl एक आयनिक यौगिक है। इसलिए यह सोडियम आयन और क्लोराइड आयन बनाने के लिए जलीय घोल में विलीन हो जाता है। जलीय घोल में मुक्त क्लोराइड आयनों की उपस्थिति के कारण, यह AgNO3 के साथ AgCl के सफेद अवक्षेप का निर्माण करता है, लेकिन CHCl3 जलीय घोल में क्लोराइड आयनों का उत्पादन नहीं करता है और यह AgNO3 के साथ प्रतिक्रिया करने पर किसी भी अवक्षेप का उत्पादन नहीं करेगा।

#7 आयोनिक बांड वास्तविक बंधन नहीं हैं- इस कथन के औचित्य को सिद्ध करो।

सहसंयोजक यौगिकों में, दो परमाणु एक या अधिक जोड़े इलेक्ट्रॉनों को एक-दूसरे के साथ निश्चित दिशा वाले बांड बनाते हैं। लेकिन इलेक्ट्रोवेलेंट यौगिकों में, दो परमाणुओं के बीच का बंधन उनके मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक बल के कारण cations और anions के बीच आकर्षण का कारण बनता है। इसलिए, इलेक्ट्रॉन जोड़ी को शामिल आयनों द्वारा साझा नहीं किया जाता है। इसीलिए आयनिक बंधों को वास्तविक बंधन नहीं माना जाता है।

#8 किसी भी आयनिक यौगिक में उच्च क्वथनांक और गलनांक क्यों होता है?

आयनिक यौगिकों में, विपरीत चार्ज वाले आयनों को आकर्षण के मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक बल द्वारा एक साथ रखा जाता है। बड़ी संख्या में विरोधी चार्ज वाले आयनों के बीच आपसी आकर्षण बड़े क्रिस्टल लैटिस का निर्माण करता है। इन क्रिस्टल लैटिस से आयनों को अलग करने के लिए बड़ी मात्रा में ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए, आयनिक यौगिक में उच्च क्वथनांक और क्वथनांक होते हैं।

#9 आयनिक यौगिक प्रकृति में कठोर क्यों होते हैं?

आयनिक यौगिकों में, बड़ी संख्या में विपरीत चार्ज वाले आयनों को आकर्षण के एक मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक बल द्वारा एक साथ रखा जाता है, जिसके परिणामस्वरूप बड़े क्रिस्टल लैटिस होते हैं। आयनों को क्रिस्टल में बारीकी से पैक किया जाता है और उनके बीच का अंतर-आणविक स्थान(intermolecular space) बहुत कम होता है। आयनिक यौगिक की कठोरता बहुत कम जगह में बड़ी संख्या में आयनों के एकत्रीकरण के कारण होती है।

#10 आयोनिक यौगिक पिघले अवस्था (molten state) में या जलीय घोल (aqueous solution) में गैर कंडक्टर ठोस अवस्था में विद्युत् का संचालन करते हैं। कारण सहित बताइए।

ठोस अवस्था में, आयनिक यौगिक में Cations और Anions को एक मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक बल द्वारा आकर्षित किया जाता है। इसलिए आयन स्थिर और यौगिक ठोस अवस्था में बिजली का संचालन करने में विफल रहते हैं। हालांकि जब यौगिक पिघले हुए अवस्था में होता है या पानी में घुल जाता है, तो क्रिस्टल लैटिस टूट जाती है और आयन अलग हो जाते हैं। ऐसे मोबाइल आयन की उपस्थिति के कारण, आयनिक यौगिक पिघले अवस्था में या जलीय घोल में विद्युत् का संचालन करते हैं।

#11 आयनिक यौगिकों को शामिल करने वाली प्रतिक्रियाएं तेज दर से क्यों होती हैं?

आयनिक यौगिकों की प्रतिक्रियाएं आमतौर पर घोल(solutions) में होती हैं। घोल में, आयनिक यौगिक आयनों को बनाने के लिए अलग हो जाते हैं जो प्रतिक्रिया में भाग लेते हैं। आयनों की भागीदारी के कारण, प्रतिक्रियाएं तेज दर से होती हैं।

#12 बताइए कि आयनिक यौगिक ध्रुवीय सॉल्वैंट्स में घुलनशील क्यों होते हैं?

जब एक आयनिक यौगिक एक ध्रुवीय विलायक (polar solvents) में विघटित होता है, तो ध्रुवीय विलायक का ऋणात्मक चार्ज ठोस के क्रिस्टल लैटिस में मौजूद cations को आकर्षित करता है। इसी तरह, ध्रुवीय विलायक का धनात्मक चार्ज ठोस के क्रिस्टल लैटिस में मौजूद Anions को आकर्षित करता है। विलायक अणुओं द्वारा यह आकर्षण क्रिस्टल लैटिस में cations और Anions के बीच आकर्षण बल को कम करता है। इसलिए, विघटित आयन अलग हो जाते हैं और एक स्थिर होने के लिए घोल(solution) में विलायक के अणुओं से घिरे होते हैं। यही कारण है कि ध्रुवीय सॉल्वैंट्स में आयनिक यौगिक घुलनशील होते हैं।

#13 गैर-ध्रुवीय सॉल्वैंट्स में आयनिक यौगिक घुलनशील क्यों हैं?

एक गैर ध्रुवीय विलायक (non-polar solvent) के अणु आयनिक यौगिक के आयनों को कुशलता से आकर्षित नहीं कर सकते हैं। इसलिए, गैर-ध्रुवीय विलायक (non-polar solvent) में आयनिक यौगिक आमतौर पर अलग(dissociate) नहीं होते हैं। यही कारण है कि आयनिक यौगिक आमतौर पर गैर-ध्रुवीय सॉल्वैंट्स(non-polar solvent) में घुलनशील होते हैं।

#14 एक यौगिक में एक उच्च क्वथनांक और गलनांक होता है। यह ठोस अवस्था में बिजली का संचालन नहीं करता है बल्कि घोल(solutions) में एक अच्छा कंडक्टर( विद्युत् का चालक) है। यौगिक किस प्रकार के बंधन में मौजूद है? यौगिक के घटक कणों की प्रकृति क्या है?

यौगिक एक आयनिक या विद्युतीय यौगिक (ionic or electrovalent compound) है। इसलिए, इसमें इलेक्ट्रोल्वेंट बॉन्ड मौजूद होता है।
यौगिक cations और anions से बना है।

#15 सहसंयोजक अणुओं (covalent molecules)को वर्गीकृत करें ।

सहसंयोजक अणु (covalent molecules) दो प्रकार के होते हैं। वे हैं-
i) सहसंयोजक प्राथमिक अणु(Covalent elementary molecules):- एक ही तत्व के परमाणुओं को सहसंयोजक अणु बनाने के लिए एक दूसरे के साथ सहसंयोजक बंध होते हैं। हाइड्रोजन, ऑक्सीजन, नाइट्रोजन, फ्लोरीन आदि इस प्रकार के उदाहरण हैं।
ii) सहसंयोजक यौगिक अणु(Covalent compound molecules): – विभिन्न तत्वों के परमाणु सहसंयोजक यौगिक अणुओं को बनाने के लिए एक दूसरे के साथ सहसंयोजक बंध होते हैं। अमोनिया, कार्बन डाइऑक्साइड, हाइड्रोजन क्लोराइड, मीथेन आदि इस प्रकार के उदाहरण हैं।

#16 ग्लूकोज ठोस है लेकिन मीथेन एक गैस है, हालांकि दोनों सहसंयोजक यौगिक हैं। स्पष्ट कीजिए।

एक सहसंयोजक यौगिक के अणुओं के बीच आकर्षण बल (force of attraction) बहुत कमजोर है और आणविक द्रव्यमान(molecular mass) में वृद्धि के साथ आकर्षक बल बढ़ता है। ग्लूकोज का आणविक द्रव्यमान मीथेन की तुलना में बहुत अधिक है और इसलिए ग्लूकोज अणु के बीच आकर्षण बल मिथेन अणुओं के बीच की तुलना में अधिक मजबूत है। इस प्रकार, ग्लूकोज कमरे के तापमान(room temperature) पर ठोस है लेकिन मीथेन गैस है।

#17 स्पष्ट करें कि नेफ़थलीन पानी में अघुलनशील क्यों है लेकिन आसानी से बेंजीन में घुल जाता है?

सहसंयोजक अणु (Covalent molecules )आमतौर पर ध्रुवीय सॉल्वैंट्स(polar solvents) में अघुलनशील और नॉनपोलर सॉल्वैंट्स (nonpolar solvents) में घुलनशील होते हैं। पानी एक ध्रुवीय विलायक है जबकि बेंजीन एक गैर-ध्रुवीय विलायक है। इसलिए, नेफ़थलीन बेंजीन में घुलनशील एक सहसंयोजक यौगिक है, लेकिन पानी में अघुलनशील है।

#18 सोडियम क्लोराइड का जलीय घोल बिजली का संचालन करता है लेकिन चीनी या ग्लूकोज का जलीय घोल बिजली का संचालन नहीं करता है। समझाओ क्यों।

सोडियम क्लोराइड एक आयनिक यौगिक है जो सोडियम (Na+) आयनों और क्लोराइड (Cl-) आयनों को बनाने के लिए जलीय घोल में घुल जाता है। ये आयन बिजली के संचालन के लिए जिम्मेदार हैं और इसलिए सोडियम क्लोराइड जलीय घोल में बिजली का एक अच्छा कंडक्टर है। दूसरी ओर, चीनी या ग्लूकोज सहसंयोजक यौगिक घोल में नहीं घुलते हैं और इसलिए वे बिजली का संचालन नहीं करते हैं।

#19 यद्यपि HCl एक सहसंयोजक यौगिक है, लेकिन इसका जलीय घोल बिजली का संचालन करता है। क्यों?

क्लोरीन की Electronegativity हाइड्रोजन की तुलना में अधिक है। इसके फलस्वरूप, HCl अणु में हाइड्रोजन और क्लोरीन परमाणु के बीच साझा की गई इलेक्ट्रॉन जोड़ी क्लोरीन परमाणु की ओर अधिक स्थानांतरित होती है। इसके कारण, हाइड्रोजन परमाणु पर आंशिक धनात्मक चार्ज (positive charge) विकसित होता है और क्लोरीन परमाणु पर आंशिक ऋणात्मक चार्ज(negative charge) विकसित होता है।
पानी भी ध्रुवीय अणु है जिसमें हाइड्रोजन परमाणु को आंशिक रूप से धनात्मक होता है और ऑक्सीजन को आंशिक रूप से ऋणात्मक होता है। HCl और पानी के अणुओं के विपरीत आवेशों के बीच आकर्षण बल के कारण, HCl आयनों को H3O+ आयन और Cl- आयन बनाता है। घोल में इन आयनों के गठन के परिणामस्वरूप, HCl बिजली का संचालन करता है।

#20 सहसंयोजक यौगिकों का गलनांक और क्वथनांक सामान्यतः क्यों कम होते हैं?

सहसंयोजक यौगिकों के अणुओं के बीच कार्य करने वाली अंतः-आणविक बल बहुत कमजोर हैं। अतः अणुओं को अलग करने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। इसलिए,  सहसंयोजक यौगिकों में आमतौर पर गलनांक और क्वथनांक कम होते हैं।

#21 क्लोरीन अणु बनते हैं लेकिन नियॉन अणु मौजूद नहीं होते हैं। समझाओ क्यों।

 क्लोरीन परमाणु के सबसे बाहरी कक्ष (outermost shell) में 7 इलेक्ट्रॉनों होते हैं क्लोरीन परमाणुओं में एक साझा साझीदार बनाने के लिए एक-एक इलेक्ट्रॉन का योगदान होता है और इस तरह से दोनों अपने ऑक्टेट(Octet) को पूरा करते हैं। इलेक्ट्रॉन जोड़ी के साझाकरण से क्लोरीन अणु का निर्माण होता है।

 दूसरी ओर, नियॉन-परमाणुओं में पहले से ही ऑक्टेट(Octet) भरा हुआ है और इसलिए नीयन (Ne2) अणु बनाने के लिए एक दूसरे के साथ गठबंधन करने की कोई प्रवृत्ति नहीं दिखाते हैं।

#22 ऑक्सीजन की लुईस डॉट संरचना (Lewis dot structure) को व्याख्या करो।

दो ऑक्सीजन परमाणु एक दूसरे के साथ मिलकर सहसंयोजक बंधन बनाते हैं जिसमें दोनों परमाणु नियोन के स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को प्राप्त करते हैं। लेकिन ऑक्सीजन अणु की लुईस डॉट संरचना ऑक्सीजन अणु की संरचना के बारे में सभी प्रयोगात्मक टिप्पणियों की व्याख्या करने में विफल रहती है। दरअसल, ऑक्सीजन अणु की ऐसी कोई लुईस डॉट संरचना ऑक्सीजन के सभी गुणों का वर्णन नहीं कर सकती है।

#23 सोडियम अत्यधिक प्रतिक्रियाशील धातु है जो पानी के साथ हिंसक प्रतिक्रिया करता है। क्लोरीन भी अत्यधिक #23 प्रतिक्रियाशील गैर-धातु है जिसमें मजबूत ऑक्सीकरण गुण होता है लेकिन NaCl का यौगिक सुरक्षित रूप से आम नमक के रूप में उपयोग किया जाता है। कारण सहित बताइए।

आयन आम तौर पर मुक्त परमाणुओं की तुलना में अधिक स्थिर होते हैं। रासायनिक संयोजनों के दौरान, सोडियम आयन सोडियम आयन बनाने के लिए एक इलेक्ट्रॉन खो देता है और क्लोरीन आयन आसानी से उस इलेक्ट्रॉन को क्लोराइड आयन बनाने के लिए स्वीकार करता है। सोडियम आयन (Na +) और क्लोराइड आयन (Cl-) दोनों में अपने निकटतम कुलीन गैसों का एक स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है। NaCl के मामले में, NaCl के क्रिस्टल बनाने के लिए बड़ी संख्या में Na + और Cl- आयन एक साथ एकत्रित होते हैं। इसलिए , सोडियम और क्लोरीन के मुक्त परमाणु NaCl में मौजूद नहीं हैं और यह यौगिक मुक्त सोडियम और क्लोरीन परमाणुओं जितना प्रतिक्रियाशील नहीं है। इसलिए, हम NaCl को साधारण नमक के रूप में सुरक्षित रूप से उपयोग कर सकते हैं।

#24 A और B दो तत्वों की परमाणु संख्या क्रमशः 19 और 17 है। A और B के बीच किस प्रकार का यौगिक बनाया जाएगा? आपने जवाब का औचित्य साबित करें।

A का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास – K = 2, L = 8, M = 8, N = 1
B का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास- K = 2, L = 8, M = 7
इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन(electronic configurations) से, यह आसानी से समझा जा सकता है कि A में Argan (2,8,8) के स्थिर इलेक्ट्रॉनिक कॉन्फ़िगरेशन(electronic configurations) को प्राप्त करने के लिए अपने बाहरी शेल से इलेक्ट्रॉन को छोड़ने की एक मजबूत प्रवृत्ति है। इसलिए, A आसानी से A + आयन बनाएगा।
दूसरी ओर B के पास निकटतम नोबल गैस Ar (2,8,8) के स्थिर इलेक्ट्रॉनिक विन्यास(electronic configurations) से केवल एक इलेक्ट्रॉन छोटा है। इसलिए, यह आयन बनाने के लिए एक इलेक्ट्रॉन को स्वीकार करने की एक मजबूत प्रवृत्ति दिखाएगा। ये आयन आयनिक यौगिक AB में बनने वाले आकर्षण के इलेक्ट्रोस्टैटिक बल (electrostatic force of attraction) द्वारा बांधेंगे।

5/5
error: Content is protected !!