Concers About Environment
हमारे पर्यावरण के प्रति चिंताए

इस पोस्ट में आप क्लास 10 के भौतिक विज्ञान के बारे जानकारी प्राप्त करने जा रहें हैं। Concerns About Environment के इस चैप्टर में आप निम्न टॉपिक्स के Question/Answer को जान पाएंगे:- Concerns About Environment, Environment, Atmosphere & Its Layers, Green House Gas, Green House Effect, Global Warming etc

Concerns About Environment भौतिक विज्ञान का पहला चैप्टर है। आप सारे के सारे प्रश्नोत्तर को याद कर लीजिये। ये सारे प्रश्न माध्यमिक परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। हमारे पर्यावरण के प्रति चिंताए  (Concerns About Environment) Class 10 / Madhyamik Pariksha के ग्रुप – B का हिस्सा है। 

क्या आप जानते हैं?

Environment Day (पर्यावरण दिवस) की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र संघ की संस्था आम सभा (जनरल असेंबली) ने 1972 ईस्वी में की थी प्रत्येक वर्ग के 6 जून को यह दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का मुख्य उद्देश्य पूरे विश्व के लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक बनाना है और इसके लिए राजनैतिक प्रयासों के द्वारा लोगों में जागृति लाना है। इस दिवस को मनाने का एक अन्य उद्देश्य हमारे आसपास के वातावरण के सौंदर्य की रक्षा करना भी है।

ATMOSPHERE & ITS LAYERS

1. पर्यावरण कहने से क्या समझते हैं?

 पर्यावरण शब्द ‘परि’ तथा ‘आवरण’ से मिलकर बना है जिसका अर्थ होता है- चारों ओर का आवरण जिससे हम सब ढके हुए हैं अर्थात् पर्यावरण वह परिवृत्त है जो मानव को चारों ओर से घेरे हुए हैं तथा जिसका प्रभाव मानव के विकास पर पड़ता है।

 पर्यावरण शब्द की उत्पत्ति फ्रेंच भाषा के शब्द ‘Environer’ से हुई है जिसका तात्पर्य है- ‘घेरना’।

2. Environment (पर्यावरण) का क्या महत्व है?

पर्यावरण का महत्व-

  1. पर्यावरण मनुष्य को नवीकरणीय तथा गैर-नवीकरणीय दोनों प्रकार के संसाधन प्रदान करता है।
  2. पर्यावरण हानिकारक अवशेषों तथा उप-उत्पादों को आत्मसात भी करता है अर्थात यह अवशेषों को पचाता भी है।
  3. पर्यावरण जैव विविधता द्वारा जीवन को भी निर्धारित करता है।

3. वायुमंडल क्या है?

वायुमंडल(Atmosphere):- पृथ्वी के चारों तरफ जो गैसीय आवरण है उसे पृथ्वी का वायुमंडल कहते हैं। अर्थात् पृथ्वी के चारों ओर लगभग 400-500 किलोमीटर की ऊंचाई तक गैसों का एक आवरण है,वही वायुमंडल कहलाता है।

4. पृथ्वी के वायुमंडल के परतो का नाम लिखो।

पृथ्वी के वायुमंडल के परतों का नाम- पृथ्वी के वायुमंडल को तापक्रम और दबाव की विभिन्नता के आधार पर मुख्य रूप से 5 परतों में बांटा गया है:

  1. अधोमंडल(परिवर्तन मंडल/क्षोभमंडल/ट्रोपोस्फीयर)
  2. समताप मंडल( स्ट्रेटोस्फीयर)
  3. मध्य मंडल (मेसोस्फीयर)
  4. तापमंडल (थर्मोस्फीयर)
  5. बर्हिमंडल (आयतन मंडल/ एक्सोस्फीयर)

5. अधोमंडल(परिवर्तन मंडल/क्षोभमंडल/ट्रोपोस्फीयर) की विशेषता लिखो।

अधोमंडल(परिवर्तन मंडल/क्षोभमंडल/ट्रोपोस्फीयर) की विशेषता:-

  • Troposphere पृथ्वी के वायुमंडल का सबसे निचली परत है।(इस कारण इस मंडल/परत को अधोमंडल कहते हैं ।)
  • क्षोभमंडल पृथ्वी की सतह से लगभग 12 किमी की ऊँचाई तक फैली है ।
  • गर्मी, वर्षा, आंधी, तूफान, घन-गर्जन, चक्रवात, प्रतिचक्रवात एवं अन्य सभी प्रकार की मौसम संबंधी घटनाएं इसी मंडल में घटित होती है। इसी से इस मंडल को ‘क्षोभ मंडल’ भी कहते हैं।
  • ट्रोपोस्फीयर प्रति 165 मीटर की ऊंचाई पर 1 डिग्री सेल्सियस तापमान तथा प्रति 110 मीटर की ऊंचाई पर 1 सेंटीमीटर वायु-भार कम होता जाता है। ऊंचाई के अनुसार तापमान तथा वायु-भार में परिवर्तन होने के कारण इस मंडल को ‘परिवर्तन मंडल’ भीकहा जाता है।

6. समताप मंडल( स्ट्रेटोस्फीयर) की विशेषता लिखो।

समताप मंडल( स्ट्रेटोस्फीयर) की विशेषता:-

  • Stratosphere पृथ्वी के वायुमंडल का दूसरा सबसे निचली परत है।
  • समताप मंडल पृथ्वी की क्षोभमंडल के ट्रोपोपज(Tropopause) से स्ट्रेटोपज (Sratopause) तक फैली है । अर्थात् लगभग 12 किमी की ऊँचाई से लगभग 50 किमी की ऊँचाई तक स्ट्रेटोस्फीयर फैली है ।
  • इस मंडल के निचले भाग में ओजोन गैस की अधिकता होती है अतः इस मंडल में ओजोन मंडल विद्यमान है।
  • इस मंडल में आंधी, तूफान, हिमवर्षा एवं घन-गर्जन नहीं होते हैं।
  • जेट प्लेन और मौसम की जानकारी लेने वाले बैलून इस परत में ही आते हैं। यह सबसे ऊंची परत है जिसे जेट पावर एयरक्राफ्ट द्वारा जाना जाता है।

7. मध्य मंडल (मेसोस्फीयर) की विशेषता लिखो।

मध्य मंडल (मेसोस्फीयर) की विशेषता:-

  • मध्य मंडल (मेसोस्फीयर) पृथ्वी के वायुमंडल का तीसरी सबसे ऊँची परत है।
  • मध्य मंडल (मेसोस्फीयर) पृथ्वी की समताप मंडल के स्ट्रेटोपज (Sratopause) से मेसोपज (Mesopause) तक फैली है । अर्थात् लगभग 50 किमी की ऊँचाई से लगभग 80 किमी की ऊँचाई तक मेसोस्फीयर फैली है ।
  • अंतरिक्ष से वायुमंडल में आने वाले अधिकतर Meteors(उल्कापिंड) प्रवेश के समय इसी परत में जल जाते हैं।
  • मध्य मंडल (मेसोस्फीयर) में तापमान ऊंचाई के साथ घटता जाता है और इस मंडल के निचले भाग पर वायुदाब समुद्री तल से करीब 1% कम होता रहता है। मेसो मंडल के मेसोपज के आसपास तापमान करीब करीब -90°C (- 130°F) तक होता है।

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8. तापमंडल (थर्मोस्फीयर) की विशेषता लिखो।

तापमंडल (थर्मोस्फीयर) की विशेषता:-

  • तापमंडल (थर्मोस्फीयर) पृथ्वी के वायुमंडल का दूसरा सबसे ऊँची परत है।
  • तापमंडल (थर्मोस्फीयर) पृथ्वी की मेसोमंडल के मेसोपज (Mesopause) से थर्मोपज (Thermopause) तक फैली है । अर्थात् लगभग 80 किमी की ऊँचाई से लगभग 700 किमी की ऊँचाई तक थर्मोस्फीयर फैली है ।
  • सौर ऊर्जा को ग्रहण कर तापमंडल (थर्मोस्फीयर) मंडल के निचले भाग के गैस के अणु व परमाणु आयन के रूप में बदल जाते हैं । आयन की अधिकता के कारण इस मंडल में निचले भाग को आयन मंडल कहते हैं।
  • तापमंडल (थर्मोस्फीयर) में अंतरिक्ष यान(Space Shuttle) और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन(International Space Station) पृथ्वी का चक्कर लगा रहे हैं।
  • वायुमंडल के इस परत में ऊंचाई के साथ तापमान बढ़ता जाता है क्योंकि सूर्य से आने वाले कॉस्मिक किरण, गामा किरण, एक्स किरण तथा UV किरणों का अवशोषण अत्यधिक मात्रा में इस मंडल में होता है।
  • इस मंडल में आवेशित कण दिन में सूर्य से प्रकाश प्राप्त करते हैं तथा रात में दिन के संचित प्रकाश को आकाश में लौटा देते हैं। इस कारण अंधेरी रात में भी कुछ प्रकाश रहता हैं। इस प्रकाश को ध्रुवीय ज्योति (Aurora/अरोरा) कहते हैं।
  • थर्मोस्फीयर के उत्तरी गोलार्ध में औरोरा बोरियलिस(Aurora Borealis)/सुमेरू ज्योति तथा दक्षिणी गोलार्ध में औरोरा ऑस्ट्रेलिस(Aurora Astralis)/कुमेरू ज्योति दिखते हैं।
  • यह मंडल रेडियो तरंगों को पृथ्वी की ओर परावर्तित कर देता है तथा पृथ्वी उन इन्हें इसी मंडल की ओर परावर्तित कर देती है इसी से हम पृथ्वी के विभिन्न भागों में रेडियो स्टेशन के वायरलेस की आवाज सुन लेते हैं।

9. बर्हिमंडल (आयतन मंडल/ एक्सोस्फीयर) की विशेषता लिखो।

बर्हिमंडल (आयतन मंडल/ एक्सोस्फीयर) की विशेषता:-

  • बर्हिमंडल (आयतन मंडल/ एक्सोस्फीयर) वायुमंडल का सबसे ऊपरी वाह्य(बाहरी) परत है।
  • पृथ्वी की तापमंडल (थर्मोस्फीयर) के थर्मोपज (Thermopause) अर्थात् लगभग 700 किमी की ऊँचाई से लगभग 10000 किमी की ऊँचाई तक बर्हिमंडल (आयतन मंडल/ एक्सोस्फीयर) फैली है ।
  • बर्हिमंडल (आयतन मंडल/ एक्सोस्फीयर) मंडल में जलवायु संबंधी कोई भी क्रिया नहीं होती है।

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10. ट्रोपोपॉज़ क्या है?

पृथ्वी की सतह से 10 किमी की दूरी पर क्षोभमंडल और समताप मंडल के बीच की पतली परत को Tropopause के रूप में जाना जाता है। इस परत में ऊंचाई बढ़ने के साथ तापमान में बदलाव नहीं होता है।

11. स्ट्रैटोपॉज़ क्या है?

स्ट्रैटोस्फीयर और मेसोस्फीयर मेसोस्फीयर के बीच की पतली परत जहां तापमान में परिवर्तन लगभग नगण्य हो जाता है, स्ट्रैटोपॉज़(Stratopause) के रूप में जाना जाता है।

12. Normal Lapse Rate क्या है?

पृथ्वी की सतह से वायुमंडल को ऊपर ले जाने की निश्चित दर पर तापमान में धीरे-धीरे कमी की घटना को Normal Lapse Rate के रूप में जाना जाता है।

13. क्षोभमंडल को परिभाषित करें। इसे अशांत क्षेत्र क्यों कहा जाता है?

 वायुमंडल की सबसे निचली परत जो समुद्र तल से 12 किमी की ऊंचाई तक फैली हुई है, ट्रोपोस्फीयर( क्षोभमंडल) कहलाती है।

 इस परत में अधिकांश वायुमंडलीय जल वाष्प, बादल आदि के कण होते हैं। इस प्रकार, इस क्षेत्र में सभी प्राकृतिक घटनाएं जैसे स्ट्रोम, बारिश, बिजली, गरज आदि होती हैं। तो, यह अशांत परत या क्षेत्र के रूप में भी जाना जाता है।

14. समताप मंडल क्या है? गतिशील रूप से स्थिर(dynamically stable) क्यों कहा जाता है?

वायुमंडल की वायुमंडलीय परत जो समुद्र तल से 50 किमी की ऊंचाई तक क्षोभमंडल से ऊपर तक फैली हुई है, स्ट्रैटोस्फियर(Stratosphere) कहलाती है।

यह परत बादलों से लगभग मुक्त है। कम धूल के कण कम मात्रा में मौजूद होते हैं, जल वाष्प की कमी के कारण बादल नहीं बनता है। तो, समताप मंडल में बिजली, तूफान, बारिश आदि से जुड़ी कोई अशांति नहीं है। इस प्रकार, इसे गतिशील रूप से स्थिर कहा जाता है।

15. ओजोनोस्फीयर क्या है? यह परत इतनी आवश्यक क्यों है?

समताप मंडल की ऊपरी परत जो पृथ्वी की सतह से 16 से 30 किमी ऊपर फैली हुई है, जहाँ ओज़ोन गैस की सांद्रता अधिकतम है, जिसे ओज़ोनोस्फीयर(Ozonosphere) के रूप में जाना जाता है।

सूरज की हानिकारक यूवी किरणें ओजोन परत द्वारा अवशोषित होती हैं। Stratosphere में ओजोन परत यूवी किरणों को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने से रोकती है और इस प्रकार, जीवों को इसके हानिकारक प्रभावों से बचाती है। यही कारण है कि ओजोनोस्फीयर इतनी आवश्यक है।

16. मेसोस्फीयर क्या है? मेसोस्फीयर की शीर्ष परत का नाम बताएं।

समताप मंडल के ऊपर वायुमंडलीय परत जो थर्मोस्फीयर से 85 किमी नीचे तक फैली हुई है, को मेसोस्फीयर(Mesosphere) के रूप में जाना जाता है।

मेसोस्फीयर की शीर्ष परत को मेसोपॉज(Mesopause) के रूप में जाना जाता है।

17. थर्मोस्फेयर क्या है? इसका नाम ऐसा क्यों है?

500 किमी तक फैले मेसोस्फीयर के ऊपर की वायुमंडलीय परत को थर्मोस्फीयर(Thermosphere) के रूप में जाना जाता है।

जैसे ही हम पृथ्वी की सतह से ऊपर जाते हैं, थर्मोस्फेरिक परत का तापमान अचानक बढ़ने लगता है। लगभग 120 किमी की ऊँचाई पर तापमान लगभग 500 ° C होता है, 200 किमी की ऊँचाई पर तापमान लगभग 700 ° C हो जाता है और 480 किमी पर तापमान लगभग 1232 ° C हो जाता है। इस परत को थर्मोस्फीयर कहा जाता है।

18. आयनमंडल क्या है? इसका नाम क्यों रखा गया है?

थर्मोस्फेयर (80-400 किमी) की निचली परत को आयनमंडल(Ionosphere) के रूप में जाना जाता है।

इस क्षेत्र में मुख्य रूप से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैसें होती हैं। कॉस्मिक रेडिएशन, एक्स-रे, सूर्य से आने वाली गामा किरणें इन गैसों को आयनित करती हैं। नतीजतन, इस परत में बड़ी संख्या में आयन और मुक्त इलेक्ट्रॉन होते हैं। इस क्षेत्र में आयनों की उच्च सांद्रता के कारण परत को आयनमंडल कहा जाता है।

19. अरोरा कैसे बनता है? 'औरोरा बोरेलिस' और 'अरोरा ऑस्ट्रालिस' क्या हैं?

आयन मंडल में मुख्य रूप से नाइट्रोजन और ऑक्सीजन गैसें होती हैं। ब्रह्मांडीय विकिरण, एक्स-रे, सूर्य से आने वाली गामा किरणें इन गैसों को आयनित करती हैं और बड़ी संख्या में आयनों के साथ-साथ मुक्त इलेक्ट्रॉनों का उत्पादन करती हैं। इन इलेक्ट्रॉनों को फिर से आयनों द्वारा लिया जाता है। इन प्रक्रियाओं के दौरान इलेक्ट्रॉन प्रकाश किरणों के रूप में विकिरण छोड़ते हैं। इसे औरोरा(Aurora) के नाम से जाना जाता है।

उत्तरी ध्रुव में बनने वाले अरोरा को ‘औरोरा बोरेलिस’ (Aurora Borealis) के नाम से जाना जाता है और दक्षिणी ध्रुव पर बने अरोरा को ‘अरोरा ऑस्ट्रलिस’ (Aurora Australis ) कहा जाता है।

20.समताप मंडल पर बढ़ती ऊंचाई के साथ तापमान क्यों बढ़ता है?

समताप मंडल में मौजूद ऑक्सीजन अणुओं को सूर्य की यूवी-किरणों द्वारा परमाणु ऑक्सीजन में अपमानित किया जाता है। ये ऑक्सीजन परमाणु तब ओजोन (02) अणु बनाने के लिए आणविक ऑक्सीजन के साथ गठबंधन करते हैं। अंतिम चरण प्रकृति में बहुत अधिक है और बड़ी मात्रा में गर्मी पैदा करता है। नतीजतन, इस परत का तापमान बढ़ता है और परत के शीर्ष पर लगभग 0 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है।

21. ओजोन छिद्र क्या है?

मानव सभ्यता के विकास के लिए रसायनों और प्रौद्योगिकी के बढ़ते उपयोग से ओजोन परत का क्रमिक क्षरण हुआ है। ओजोन रिक्तीकरण की दर ओजोन गठन की तुलना में बहुत अधिक है, जिसके परिणामस्वरूप समताप मंडल के कुछ क्षेत्रों में ओजोन छिद्र(ozone hole) के रूप में जाना जाता है।

22. कुछ मानव निर्मित रासायनिक पदार्थों को नाम दें जो ओजोन परत के क्षय के लिए जिम्मेदार हैं।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) और नाइट्रोजन के ऑक्साइड जैसे नाइट्रिक ऑक्साइड (NO) और नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO) ओजोन परत के क्षय के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार हैं।

23.ओजोनोस्फीयर की concentration को मापने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली इकाई क्या है? इकाई को परिभाषित करें।

ओजोन परत की सांद्रता को डोबसन इकाई में मापा जाता है।

0 ° C तापमान और 760 मिमी Hg दबाव में 0.01 मिमी की परत में ओजोन गैस के घनत्व को 1 डॉबसन (1 DU) कहा जाता है।

24. चर्चा करें कि ओजोन परत पर्यावरण के लिए कितना महत्वपूर्ण है।

समताप मंडल में ओजोन परत पृथ्वी के लिए सुरक्षा कवच का काम करती है। यदि समताप मंडल में ओजोन परत मौजूद नहीं होती, तो पराबैंगनी किरणें पृथ्वी की सतह तक पहुंच जातीं। इससे पृथ्वी की सतह का तापमान बढ़ जाता। बढ़े हुए तापमान से पृथ्वी पर पौधों और जानवरों के विलुप्त होने का कारण होगा। पराबैंगनी किरणों के संपर्क में आने से त्वचा कैंसर, समय से पहले मोतियाबिंद आदि कई बीमारियाँ हो सकती हैं।

25. ओजोन परत का निर्माण कैसे होता है?

UV-C (wavelength: 100-280 nm) के साथ-साथ कुछ UV-B (wavelength: 280-315 nm) समताप मंडल में मौजूद ऑक्सीजन अणुओं को परमाणु ऑक्सीजन में विघटित करता है। ये ऑक्सीजन परमाणु तब ओजोन (03) अणु बनाने के लिए आणविक ऑक्सीजन के साथ गठबंधन करते हैं। अंतिम चरण प्रकृति में अत्यधिक एक्सोथर्मिक(exothermic) है और बड़ी मात्रा में गर्मी पैदा करता है जो इस परत के तापमान को बढ़ाता है।

O2 (UV-C or UV-B) →  O + O

O2 +O → 03*

O3*+ M → O3 + M*

[Here, * sign indicates excited state. M is a neutral particle (O2 or N )]

26. ओजोन परत को नष्ट करने वाले प्राकृतिक कारणों पर चर्चा करें। ओजोन गैस की मात्रा ओजोन परत में कैसे बनी रहती है?

समताप मंडल में ओजोन अणुओं की गिरावट इसके गठन के साथ-साथ होती है। बड़े तरंग दैर्ध्य (यूवी-ए; वेवलेंथ: 315-400 एनएम) की पराबैंगनी किरणें ओजोन अणुओं को आणविक ऑक्सीजन और परमाणु ऑक्सीजन में विघटित करती हैं।

समताप मंडल में, एक साथ ओजोन अणुओं के गठन और अपघटन का चक्र। यह ओजोन अणुओं और ऑक्सीजन अणुओं के बीच एक गतिशील संतुलन बनाता है। परिणामस्वरूप, समताप मंडल में ओजोन गैस की मात्रा स्थिर रहती है।

27. स्ट्रैटोस्फियर में मौजूद ओजोन गैस महत्वपूर्ण है लेकिन ट्रोपोस्फीयर में ओजोन गैस की मौजूदगी हानिकारक है-बयान को सही ठहराती है।

सूर्य की हानिकारक यूवी किरणें ओजोन अणुओं के गठन और अपघटन के लिए समताप मंडल में मौजूद ओजोन परत द्वारा अवशोषित होती हैं। दूसरी ओर, सैन्य क्षेत्र में मौजूद ओजोन गैस एक ग्रीनहाउस गैस के रूप में कार्य करती है (यह ग्रीनहाउस के लिए लगभग 7-8% योगदान देती है)। ग्रीनहाउस प्रभाव से धरती का तापमान बढ़ता है।

28.ओजोन परत की कमी के लिए सुपरसोनिक जेटप्लान कैसे जिम्मेदार हैं?

समताप मंडल के माध्यम से उड़ान भरने वाले सुपरसोनिक जेट विमान बड़ी मात्रा में नाइट्रिक ऑक्साइड का उत्सर्जन करते हैं। नाइट्रोजन ऑक्साइड और ऑक्सीजन बनाने के लिए नाइट्रिक ऑक्साइड ओजोन के साथ प्रतिक्रिया करता है। दूसरी ओर समताप मंडल में, परमाणु ऑक्सीजन का उत्पादन करने के लिए यूवी किरणों द्वारा ओजोन अणुओं को विघटित किया जाता है, जो NO2 के साथ वापस NO उत्पन्न करने के लिए प्रतिक्रिया करता है। इस प्रकार, NO की मात्रा कभी कम नहीं होती है और ओजोन अणुओं के क्रमिक विनाश का कारण बनती है। इससे ओजोन परत का क्षय होता है।

29. ओजोन परत की कमी के हानिकारक प्रभावों पर चर्चा करें।

  1. वातावरण में ओजोन परत हानिकारक यूवी किरणों को अवशोषित करती है जो अन्यथा पृथ्वी की सतह तक पहुंचती हैं। इससे पृथ्वी के तापमान में वृद्धि होगी, जिसके परिणामस्वरूप ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ के टुकड़े पिघल जाएंगे। इस प्रकार समुद्रों और महासागरों का जल स्तर बढ़ जाएगा और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आ जाएगी।
  2. UV किरणों के संपर्क में आने से त्वचा का कैंसर हो सकता है और आंख में समय से पहले मोतियाबिंद हो सकता है, प्राकृतिक प्रतिरोधक क्षमता भी कम हो जाती है। ये किरणें फोटोकैमिकल स्मॉग के निर्माण के लिए जिम्मेदार हैं।
  3. UV किरणें पौधों में प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को रोकती हैं जिससे फसल उत्पादन कम हो जाता है।

Short Type Question

1. क्षोभमंडल के सबसे निचले भाग में वायुदाब क्या होता है?

 क्षोभमंडल के सबसे निचले हिस्से में हवा का दबाव पारा (Hg) के 76 सेमी है।

2. क्या होता है जब ओजोन अणु पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करते हैं?

 जब ओजोन अणु पराबैंगनी किरणों को अवशोषित करते हैं, तो वे ऑक्सीजन अणु बनाने के लिए विघटित हो जाते हैं।

3. वायुमंडल में ओजोन गैस के घनत्व को मापने के लिए किस उपकरण का उपयोग किया जाता है?

डोबसन स्पेक्ट्रोमीटर (Dobson Spectrometer ) का उपयोग वायुमंडल में ओजोन गैस के घनत्व को मापने के लिए किया जाता है।

4. एक सक्रिय क्लोरीन परमाणु द्वारा कितने ओजोन अणुओं को विघटित किया जा सकता है?

एक सक्रिय क्लोरीन परमाणु(active chlorine atom) ओजोन अणुओं के 1 लाख से अधिक को विघटित कर सकता है।

 

Green House Gas
Green House Gas & Effect

1. ग्रीन हाउस गैस(Green House Effect) क्या है?

ग्रीन हाउस गैस(Green House Gas):- वे गैसें जो सौर ऊर्जा को पृथ्वी के वायुमंडल में ट्रैपिङ्ग(trapping)/अवशोषित कर लेते हैं और इनफ्रारेड किरणों को बाहरी अंतरिक्ष में नहीं जाने देती हैं,  ग्रीन हाउस गैस(पौधघर गैस) कहलाते  हैं । ये गैसें वायुमंडल में उष्मा को ट्रेप कर लेते हैं और उष्मा के वायुमंडल में ट्रैप होने के कारण पृथ्वी गर्म रहती है । इनकी अधिकता के कारण ग्रीन हाउस इफ़ेक्ट अधिक उत्पन्न होता है जिससे पृथ्वी की सतह अधिक गर्म हो जाती है और हानिकारक प्रभाव उत्पन्न होते हैं।

जैसे- कार्बन डाइ ऑक्साइड(CO2), मिथेन(CH4), क्लोरो-फ्लोरो कार्बन(CFC), नाइट्रस आक्साइड (N2O), जलवाष्प (H2O)

2. पौधघर प्रभाव(Green House Effect) किसे कहते हैं?

पौधघर प्रभाव(Green House Effect):- वायुमंडल में अत्यधिक कार्बन डाइऑक्साइड की उपस्थिति से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है जिसे पौधघर प्रभाव(Green House Effect) कहते हैं।

कुछ हरे पौधे गर्म वातावरण में ही पनपते हैं। उनके लिए शीशे की दीवारों से निर्मित घर बनाया जाता है जिसे हरितगृह या पौधघर कहते हैं। शीशे की दीवारों द्वारा इनमें सूर्य से प्राप्त दृश्य विकिरणे एवं छोटी तरंग लंबाई वाली अवरक्त विकिरण (इंफ्रारेड रेडिएशन) प्रवेश करती हैं तथा पौधघर की सतह को तप्त कर देती है। ग्रीन हाउस की सतह तप्त  होने के पश्चात मुख्यतः लंबी तरंग लंबाई वाली अवरक्त विकिरणो(infrared radiation)को उत्सर्जित करती हैं जिन्हें शीशे की दीवारें परावर्तित कर देती हैं और ग्रीन हाउस को गर्म बना रहता है। ग्रीन हाउस का गर्म वातावरण हरे पौधे के पनपने के लिए अनुकूल हो जाता है और इस कारण ये पौधे बढ़ते रहते हैं। इसी प्रभाव को ग्रीन हाउस इफेक्ट कहते हैं।

3. ग्रीन हाउस इफेक्ट की अधिकता के कारण पर्यावरण पर कौन-कौन सा प्रभाव पड़ने की समस्या बढ़ जाती है?

ग्रीन हाउस इफेक्ट की अधिकता के कारण पर्यावरण पर निम्नलिखित प्रभाव पड़ने की समस्या बढ़ जाती है-

  1. जलवायु में अवांछनीय परिवर्तन से सभी जीव प्रभावित हो सकते हैं।
  2. पृथ्वी का ताप बढ़ जाने से बर्फ के पहाड़ पिघलने लगेंगे। अतः समुद्र तल की सतह में वृद्धि होने की संभावना बढ़ जाएगी। समुद्र के जल में वृद्धि होने से तटवर्ती क्षेत्र जल में डूब जाएंगे।
  3. अत्यधिक गर्मी फसलों को क्षति पहुंचा सकती हैं जिससे कृषि उत्पादन में ह्रास हो सकता है।

NB- Infrared Rays की तरंग लंबाई उस वस्तु के तापमान के विलोमानुपाती होती है। अर्थात्  अधिक तरंग लंबाई की उष्मा विकिरण आसानी से वायुमंडल से गुजर नहीं सकते हैं ।

4. यदि ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल में मौजूद नहीं होतीं तो पृथ्वी का औसत तापमान क्या होगा?

कार्बन डाइऑक्साइड, जलवाष्प आदि जैसी ग्रीनहाउस गैसों के अभाव में, पृथ्वी का औसत तापमान -30 डिग्री सेल्सियस होगा।

5. ग्रीनहाउस गैसें वायुमंडल के तापमान को कैसे बढ़ाती हैं?

सूर्य से आने वाले अवरक्त विकिरण वातावरण में मौजूद ग्रीनहाउस गैसों के माध्यम से आसानी से प्रवेश कर सकते हैं और पृथ्वी की सतह तक पहुंच सकते हैं। इनमें से कुछ विकिरण पृथ्वी की सतह से अवशोषित हो जाते हैं और गर्म हो जाते हैं। अब, गर्म पृथ्वी की सतह से निकलने वाले विकिरण लंबे तरंग-लंबाई के होते हैं और वे अब ग्रीनहाउस गैसों के माध्यम से पूरी तरह से प्रवेश नहीं कर सकते हैं। इसलिए, कुछ विकिरण पृथ्वी की सतह पर वापस लौटते हैं और पृथ्वी की सतह और उसके आसपास के तापमान में वृद्धि करते हैं।

6. वातावरण में CO2 के स्रोतों का नाम बताइए। ग्रीनहाउस प्रभाव बनाने में इसकी भूमिका पर चर्चा करें।

वायुमंडल में CO2 के स्रोत: ऑटोमोबाइल और कारखानों में जीवाश्म ईंधन के अनियंत्रित उपयोग के कारण बड़ी मात्रा में CO2 को वायुमंडल में जोड़ा जाता है। CO2 विभिन्न उद्योगों में, मुख्यतः सीमेंट उत्पादन में, बड़ी मात्रा में CO2 का उत्पादन होता है। पेड़ों के लापरवाह काटने से वातावरण में CO2 की मात्रा बढ़ जाती है।

ग्रीनहाउस प्रभाव बनाने में CO2 की भूमिका: सह की मात्रा, वायुमंडल में अधिकतम है और यह कुल ग्रीनहाउस प्रभाव में 50% से अधिक का योगदान देता है।

7. मीथेन गैस के स्रोतों का नाम बताइए। ग्रीनहाउस प्रभाव में मीथेन की भूमिका पर चर्चा करें।

मीथेन गैस के स्रोत: मीथेनोजेनिक बैक्टीरिया (मेथा-नोकोकस, मीथेनोबैक्ट-रियम) [methanogenic bacteria – metha-nococcus, methanobacte-rium] की कार्रवाई से मृत पौधों और जानवरों के अवायवीय गिरावट के कारण मीथेन गैस का उत्पादन होता है। मीथेन गैस तेल की खदानों में पाई जाती है।

ग्रीनहाउस प्रभाव में भूमिका: HEAT ENERGY( ऊर्जा) को Trap के लिए मीथेन के एक अणु की क्षमता CO2 के अणु से 25 गुना अधिक है  । यह ग्रीनहाउस प्रभाव के कुल योग में 16-20% का योगदान देता है।

8. क्लोरोफ्लोरो- कार्बन के स्रोत क्या हैं? ग्रीनहाउस प्रभाव पैदा करने में उनकी भूमिका पर चर्चा करें।

क्लोरोफ्लोरोकार्बन के स्रोत:

क्लोरोफ्लोरोकार्बन का उपयोग रेफ्रिजरेंट के रूप में बड़े पैमाने पर, इंसुलेटर के रूप में, एयरोसोल स्प्रे में प्रोपेलेंट, विलायक आदि के रूप में किया जाता था।

ग्रीनहाउस प्रभाव बनाने में CFCs की भूमिका: गर्मी ऊर्जा को फँसाने के लिए CFC अणुओं की क्षमता CO, अणु से 15000-20000 गुना अधिक होती है। ये यौगिक अत्यधिक स्थिर होते हैं और लंबे समय तक वातावरण में बने रहते हैं। ग्रीनहाउस प्रभाव में सीएफसी का योगदान 13-18% है।

9. ग्रीन हाउस प्रभाव के परिणामों पर चर्चा करें।

ग्रीन हाउस प्रभाव के परिणाम –

  1. ग्रीनहाउस प्रभाव के घातक परिणाम के रूप में, पृथ्वी की सतह और क्षोभमंडल के तापमान में लगातार वृद्धि हो रही है, जिसके परिणामस्वरूप पहाड़ों और ध्रुवीय क्षेत्रों में बर्फ के आवरण पिघल सकते हैं। इस प्रकार समुद्रों और महासागरों का जल स्तर बढ़ जाएगा और तटीय क्षेत्रों में बाढ़ आ जाएगी। नमकीन पानी कृषि भूमि को बांझ बना देगा और इसलिए, फसल उत्पादन में काफी कमी आएगी।
  2. उत्तरी गोलार्ध के देशों में लगातार बढ़ते ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण सूखा पड़ सकता है। सुपर साइक्लोन और टोरनेडोस की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ जाएगी।
  3. तीव्र गर्मी के कारण जीवित जीव विलुप्त हो जाएंगे। यह पारिस्थितिकी तंत्र को नष्ट कर देगा।
Global Warming
Global Warming

1. ग्लोबल वॉर्मिंग (वैश्विक उष्णता) क्या है?

Global Warming :- ग्लोबल वॉर्मिंग (वैश्विक उष्णता) एक प्राकृतिक घटना है जिसके फलस्वरुप पृथ्वी के समीप के वायुमंडल का औसत तापमान बढ़ जाता है।

2. ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण लिखो।

ग्लोबल वॉर्मिंग का कारण:- वायुमंडल की रासायनिक संरचना में परिवर्तन, ओजोन क्षरण, तीव्र गति से ग्रीन हाउस गैसों का उत्सर्जन, औद्योगीकरण, नगरीकरण, भूमि उपयोग में परिवर्तन, खासकर वन विनाश आदि कारण है जो ग्लोबल वॉर्मिंग के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार माने जाते हैं। पृथ्वी  विकिरण द्वारा जो उष्मा छोड़ती है, उसे कार्बन डाईऑक्साइड को अवशोषित कर लेती है। अतः वायुमंडल में कार्बन डाईऑक्साइड  का परिमाण अधिक होने से ग्रीन हाउस प्रभाव बढ़ जाता है जिसके फलस्वरुप पृथ्वी और उसके समीप के वायुमंडल का तापमान बढ़ता जाता है। इस कारण ग्लोबल वॉर्मिंग होता है। अतः ग्लोबल वॉर्मिंग का मुख्य कारण वायुमंडला में कार्बन डाईऑक्साइड का परिमाण बढ़ना है।

3. ग्लोबल वॉर्मिंग से हानियाँ/ प्रभाव के बारे क्या जानते हो?

ग्लोबल वॉर्मिंग से हानियाँ/ प्रभाव-

  1. ग्लोबल वॉर्मिंग से वायुमंडल का तापमान बढ़ जाता है जिससे पृथ्वी अत्यधिक गर्म और शुष्क हो जाती है जिससे पौधों एवं जंतुओं को नुकसान होता है ।
  2. ग्लोबल वार्मिंग से वायुमंडल का तापमान बढ़ता है जिससे Polar Caps के बर्फ पिघलेगे। इससे समुद्र जल का स्तर ऊपर उठेगा और तटीय क्षेत्र एवं द्वीप जलमग्न हो सकते हैं ।
  3. मलेरिया, अन्य ट्रॉपिकल रोग(Tropical diseases) का बढ़ना और कीटों के जीवन की अवधि कम पढ़ जाना।

4. मानव द्वारा संश्लेषित ग्रीन हाउस गैसों की वैश्विक तापवृद्धि में भूमिका के बारे लिखो।

मानव द्वारा संश्लेषित ग्रीन हाउस गैसों की वैश्विक तापवृद्धि में भूमिका:-

  1. कार्बन डाई ऑक्साइड- मनुष्य द्वारा उपयोग किए जा रहे जीवाश्म ईंधन के जलने से CO2 गैस की वृहत मात्रा प्रति वर्ष वायुमंडल में मुक्त होती है । वायुमंडल में पड़ने वाले ग्रीन हाउस में अधिकांश प्रतिशत 60% CO2 की ही होती है ।
  2. मिथेन- CO2 के बाद मिथेन की मात्रा सर्वाधिक है। मिथेन की वायुमंडल में सान्द्रता, धान की खेती, बायोगैस संयंत्र एवं चारागाह से उत्सर्जन के कारण है।
  3. क्लोरो-फ्लोरो कार्बन(CFC)- CFC एक कार्बन तथा हैलोजन परमाणुओ का यौगिक है। इसका उत्सर्जन रेफ्रिजेरेटर, अग्निशामक एवं एयर कंडीशनर आदि से होता है । हालांकि यह रासायनिक रूप से निष्क्रिय गैस है,परंतु ग्रीनहाउस के रूप में इसका अवदान बहुत अधिक है।
  4. नाइट्रस आक्साइड (N2O)- इस गैस का मुख्य स्रोत कृषि, जैव मात्रा का ज्वलन एवं औद्योगिक प्रक्रियाएं हैं। नाइट्रोजन जनित ईंधनों के जलने से उर्वरकों के विघटन से तथा नायलॉन निर्माण आदि से यह गैस उत्सर्जित होती है।

5. वैश्विक ताप वृद्धि को रोकने के सुरक्षात्मक उपाय बताओ।

वैश्विक ताप वृद्धि को रोकने के सुरक्षात्मक उपाय(Preventive Measures to reduce Global Warming):-

  1. कार्बन डाइऑक्साइड गैस की अधिकाधिक मात्रा प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया में उपयोग सुनिश्चित कर ग्रीन हाउस प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके लिए हमें जंगलों के द्वारा अधिक से अधिक भू-भाग को ढकने के प्रयास करना होगा।
  2. क्लोरो फ्लोरो कार्बन के स्थान पर कम ग्रीन हाउस प्रभाव डालने वाले रासायनिक यौगिकों की खोज एवं उपयोग सुनिश्चित करना होगा।
  3. जीवाश्म ईंधन का कम से कम उपयोग सुनिश्चित करना चाहिए और इसके स्थान पर वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का दोहन किया जाना चाहिए।
  4. सौर ऊर्जा, वायु ऊर्जा, भू-ऊर्जा आदि नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का विकास करना अनिवार्य होना चाहिए।
  5. नाइट्रोजन उर्वरकों की खपत पर रोक लगाई जानी चाहिए तथा हमें अधिक से अधिक नाइट्रोजन स्थिरीकरण प्रक्रिया पर निर्भर होना चाहिए।
  6. स्वचालित वाहनों का यथासंभव कम से कम प्रयोग करना

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6. ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए कुछ एहतियाती कदम उठाए जाने चाहिए।

ग्लोबल वार्मिंग को रोकने के लिए कुछ एहतियाती कदम-

  1. जीवाश्म ईंधन के उपयोग को नियंत्रित करना होगा।
  2. पेड़ों की कटाई को तिरछे तरीके से रोका जाना चाहिए। गैर-पारंपरिक ऊर्जा के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
  3. क्लोरोफ्लोरो कार्बन्स के उपयोग पर प्रतिबंध लगाना होगा।

7. भूमंडलीय तापक्रम(Global Warming) में वृद्धि क्या है?

ग्रीनहाउस प्रभाव के कारण पृथ्वी के तापमान में धीरे-धीरे वृद्धि की घटना को ग्लोबल वार्मिंग के रूप में जाना जाता है।

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