Force And Motion
Force And Motion

इस पोस्ट में SK Team आपको बल और गति (Force and Motion) की पूरी अवधारणा प्रदान करेगी। यह अध्याय पश्चिम बंगाल माध्यमिक शिक्षा बोर्ड के तहत पढ़ने वाले कक्षा 9 के छात्रों के लिए है। बल और गति (Force and Motion) कक्षा 9 के पाठ्यक्रम के सबसे बड़े अध्यायों में से एक है। तो, इस अध्याय में कई महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया जाएगा।
यहां इस पोस्ट में हम सब टॉपिक वाइज (Sub- Topicwise) सीखने जा रहे हैं और आप www.skstudypointsiliguri.com पर मुफ्त(FREE) अध्ययन सामग्री प्राप्त करने के लिए सही जगह पर हैं।

In this Post, SK Team will provide you the full concept of Force and Motion. This chapter is for Class 9 students studying under West Bengal Board Of Secondary Education. Force and Motion is one of the largest chapter in the class 9 syllabus. So, many important questions will be covered in this chapter.
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In this Post, SK Team will provide you the full study materials on REST and MOTION.

इस पोस्ट में, SK टीम आपको REST और MOTION ( विराम और गति ) पर पूरी अध्ययन सामग्री(STUDY MATERIALS) प्रदान करेगी।

1. विराम (Rest) क्या है ? उदाहरण सहित लिखो ।

जब किसी वस्तु का समय के परिवर्तन के साथ, स्थान में किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं होता है तो वह वस्तु विराम (Rest) की अवस्था या विरामावस्था (State of Rest) में कहा जाता है।

उदाहरण: (i) जब हम स्कूल जाने से पहले टेबुल पर कोई एक पुस्तक रख देते हैं एवं स्कूल से लौटकर देखते हैं कि पुस्तक की स्थिति में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। है अर्थात् समय के परिवर्तन होने पर भी पुस्तक इसी स्थान पर है तो कहा जायेगा कि पुस्तक विराम (Rest) में है।

(ii) मकान के सामने स्थित पेड़, जो हमेशा उसी स्थान पर खड़ा रहता है अर्थात् पेड़ विरामावस्था में कहा जायेगा।

2. विराम कितने प्रकार का होता है? उदाहरण सहित लिखो ।

विराम के प्रकार (Kinds of Rest) : विराम दो प्रकार का होता है –

  1. परम विराम (Absolute Rest)
  2.  सापेक्ष विराम (Relative Rest)

1. परम विराम (Absolute Rest) : अंतरिक्ष (Space) में स्थित किसी बिंदु (Point of reference) के संदर्भ में समय के सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति में कोई परिवर्तन न हो, तो वह वस्तु परम विराम या निरपेक्ष विराम (Absolute rest) की स्थिति में कहलाती है।

किन्तु किसी भी वस्तु का परम विराम (Absolute rest) में होना कल्पना मात्र है क्योंकि अंतरिक्ष में भी सूर्य, चंद्रमा या अन्य ग्रह-नक्षत्र सभी गतिशील हैं। पृथ्वी स्वयं अपनी ही अक्ष पर घूमती हुई धीरे-धीरे वृत्तीय पथ पर आगे बढ़ती हुई सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है। इसलिए पृथ्वी की सतह पर स्थित कोई भी वस्तु पृथ्वी के साथ-साथ गतिशील है। किसी अन्य ग्रह से कोई दर्शक (Observer) देखे, तो पृथ्वी और इस पर स्थित सभी वस्तुएँ गति करती हुई दिखाई देंगी।

2. सापेक्ष विराम (Relative Rest): जब कोई वस्तु किसी बिंदु या स्थान के सापेक्ष समय के साथ-साथ अपनी जगह नहीं बदलती है तो वस्तु सापेक्ष विराम कीअवस्था में कही जाती है।

जैसे- चलती मोटरगाड़ी में बैठा अन्य बैठे यात्रियों के सापेक्ष विराम अवस्था में होता है।

2. गति (Motion) क्या है ? उदाहरण सहित लिखो ।

गति (Motion) :- जब समय के सापेक्ष किसी वस्तु की स्थिति में परिवर्तन होता है तो वह वस्तु गतिशील अवस्था (State of Motion) में मानी जाती है।

अत: हम कह सकते हैं कि जब कोई वस्तु समय के साथ अपना स्थान बदलती है वह वस्तु  गति अवस्था (State of motion) में कहलाती है।

जैसे:- चलती हुई रेलगाड़ी, उड़ता हुआ वायुयान आदि।

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3. गति (Motion) कितने प्रकार का होता है ? उनकी परिभाषा लिखो ।

गति के प्रकार (Kinds of Motion) : गति दो प्रकार की होती हैं

  1. परम गति या निरपेक्ष गति (Absolute Motion).
  2. सापेक्ष गति (Relative Motion)

1. परम गति (Absolute Motion) : जब कोई वस्तु अंतरिक्ष (Space) में स्थित किसी स्थिर संकेत बिंदु के सापेक्ष, समय के साथ-साथ अपनी जगह बदलती है तो वस्तु परम या निरपेक्ष गति में कही जाती है। परम विराम की तरह परम गति भी असंभव है।

2. सापेक्ष गति (Relative Motion): जब कोई वस्तु किसी बिंदु के सापेक्ष, समय के साथ-साथ अपनी जगह बदलती है तो वह वस्तु सापेक्ष गति में कहलाती है। प्रत्येक गति सापेक्ष ही होती है।

विराम और गति दोनों आपेक्षिक पद हैं (Rest & Motion are relative term):- विराम और गति दोनों आपेक्षिक पद (relative term) हैं। चलती हुई रेलगाड़ी में यदि हम डिब्बे के अंदर बैठे हुए किसी यात्री को देखते हैं तो हम उसे स्थिर पाते हैं, अर्थात् वह दूसरे यात्री की तुलना में आपेक्षिक विरामावस्था में है। परंतु यदि हम रेलगाड़ी के बाहर झाँके, तो पृथ्वी पर की वस्तुओं को पीछे की ओर और अपने को आगे की ओर जाते देखते हैं, अर्थात् पृथ्वी पर की वस्तुओं की तुलना में रेलगाड़ी या रेलगाड़ी के यात्री गतिमान हैं।

इस प्रकार एक ही वस्तु कभी गति में तथा कभी विराम में स्थित हो सकती है। गतिशीलता सदा किसी स्थिर स्थिति की अपेक्षा देखी जाती है। पेड़, पहाड़ इत्यादि पृथ्वी के लिए स्थिर हैं किन्तु दूसरे ग्रह से देखने पर ये सब पृथ्वी की गति से चल रहे हैं। अतः विराम और गति दोनों सापेक्ष हैं। निरपेक्ष गति या विराम गति केवल कल्पना मात्र है। वास्तव में ये दोनों सापेक्ष ही होते हैं।

5. गति अवस्था के प्रकार (Kind of motion) के बारे में लिखो।

गति अवस्था के प्रकार (Kind of motion):

जब दर्जी कपड़ा सिलाई करता है तब उसका पैर सिलाई मशीन के पैडल को चलाता है तो मशीन का पहिया घूमता है, उसका सुई ऊपर-नीचे चलता है और कपड़ा आगे की ओर चलता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि गतियाँ कई प्रकार की होती है –

(i) रैखिक गति (Linear motion): – इसमें वस्तु सीधी या वक्र रेखा पर चलती है।

जैसे – बन्दूक से निकली गोली, ढलान से नीचे सरकता बालक, कैरम बोर्ड की गोटी, वक्र रेखा पर चलता कार इत्यादि।

(ii) वृत्तीय गति (Circular Motion):- इसमें वस्तु वृत्त पर चलती है।

जैसे – सूर्य के चारों ओर पृथ्वी की गति, के चारों ओर चन्द्रमा की गति, परमाणु के केन्द्रक के चारों ओर इलेक्ट्रान की गति आदि वृत्तीय गति है।

(ii) कम्पन गति (Vibrational Motion):- यह गति वस्तु के कम्पन से होता है।

जैसे- स्वरित्र (Tunning) के भुजाओं पर चोट करने से दो बिन्दुओं के बीच घंटे पर हथौड़ी से चोट करने से, सितार के तार को छेड़ने से कम्पन गति होती है।

(iv) दोलन गति (Oscillatory Motion) :- इसमें वस्तु एक निश्चित विन्दु के आगे-पीछे या ऊपर-नीचे चलती है।

जैसे – झूले को गति, दीवाल घड़ी के पेन्ड्लम में होनेवाली गति दोलन कहलाती है।

इस गतियों के अलावा भी अन्य और भी गति है जो निम्नलिखित है:-

(a) स्थानान्तरण या चलन गति (Translational Motion):- यदि कोई वस्तु एक सीधी रेखा में इस प्रकार चले कि एक निश्चित समय के पश्चात् उसके प्रत्येक कण द्वारा समान दूरी तय की आय, तो इस गति को स्थानान्तरण या चलन गति कहते है।

(b) घूर्णन गति (Rotational Motion):- यदि कोई गतिशील वस्तु किसी निक्षित विन्दु को केंद्र मानकर समान दूरी बनाए रखकर समकेन्द्रीय वृत्तीय पथ पर गमन करे, तो इस गति को घूर्णन गति या आवर्त गति कहते है।

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  4. Force And Motion (बल और गति)

वृत्तीय गति

घूर्णन गति

  1. वृत्तीय गति में कोई वस्तु किसी वस्तु के चारों तरफ वृत्तीय पथ में घुमता है।
  2. सूर्य के चारों तरफ पृथ्वी का घूमना, पृथ्वी के चारों चन्द्रमा का घूमना वृत्तीय गति का उदाहरण है।
  3. वृत्तीय गति में वस्तु की स्थिति (position) परिवर्तित होती है न कि दिग्विन्यास ।
  1. घूर्णन गति में कोई गतिशील वस्तु किसी निश्चित विन्दु को केन्द्र मानकर वृत्तीय पथ पर गमन करती है।
  2. पृथ्वी का अपने अक्ष के चारों तरफ घूमना, विद्युत पंखा का घूमना घूर्णन का उदाहरण है।
  3. घूर्णन गति में वस्तु का दिग्गविन्यास (orientation position) में परिवर्तन होता है।

2.2 गति के समीकरण

In this Post, SK Team will provide you the full study materials on Displacement, Speed, Velocity & Acceleration (2.2Equations Of Motion) under the second chapter FORCE And MOTION.

इस पोस्ट में, SK टीम आपको 2.2 गति के समीकरण के विस्थापन. चाल, वेग एवं त्वरण (Displacement, Speed, Velocity & Acceleration) पर पूरी अध्ययन सामग्री(STUDY MATERIALS) प्रदान करेगी।

1. दूरी किसे कहते हैं? इसकी इकाई लिखिए।

दूरी (Distance) :- एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में वस्तु द्वारा जिस पथ का अतिक्रमण होता है, उसे दूरी (Distance) कहते हैं।

इकाई :- C.G.S. पद्धति में दूरी की इकाई “सेंटीमीटर” है। M.K.S. तथा S.I. पद्धति में दूरी की इकाई “मीटर” है।

2. विस्थापन किसे कहते हैं? समझाओ। इसकी इकाई लिखिए।

विस्थापन (Displacement):- किसी निश्चित दिशा में, किसी गतिशील वस्तु की प्रारंभिक (initial) और अंतिम (final) स्थितियों के बीच की सबसे छोटी (लंबवत्) सरल रेखीय दूरी को उस वस्तु का विस्थापन कहते हैं।

विस्थापन एक दैशिक राशि (Vector quantity) है क्योंकि इसमें मान (Magmi tude) एवं दिशा (Direction) दोनों होती है।

माना कि कोई वस्तु A से पूरब दिशा में 4 इकाई दूरी तय कर B तक जाती है। पुनः B से उत्तर दिशा में 3 इकाई दूरी तय कर C तक जाती है। यहाँ वस्तु की प्रारंभिक स्थिति A तथा अंतिम स्थिति C है। अतः वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी = 4+3=7 इकाई

किन्तु विस्थापन AC = √ ( 42 + 3 ) = √ ( 16 + 9 )    = √ 25  =  5 इकाई ।

 इस प्रकार यहाँ वस्तु द्वारा तय की गया विस्थापन = 5 इकाई

यहाँ विस्थापन की दिशा A से C की ओर AC (अर्थात् पूर्व-उत्तर) को प्रदर्शित करता है।

इकाई :- C.G.S. पद्धति में विस्थापन की इकाई “सेंटीमीटर” है। M.K.S. तथा S.I. पद्धति में विस्थापन की इकाई “मीटर” है।

[ विस्थापन की दूरी को इकाई के रूप में व्यक्त किया जाता है। ]

3. चाल (speed) किसे कहते हैं? समझाओ। इसकी इकाई लिखिए।

चाल (speed):- किसी गतिशील वस्तु के द्वारा इकाई समय में तय की गई दूरी को उस वस्तु की चाल (speed) कहते हैं।

उदाहरण – यदि कोई बस 4 घंटे में 160 कि.मी. दूरी तय करती है तो एक घण्टे में बस 160 =40 कि.मी. – दूरी तय करेगीं । अत: बस की चाल 40 कि.मी. प्रति घण्टा कहलाती है चाहे यह दूरी किसी भी दिशा में तय किया गया हो । चाल में केवल परिमाण (Magnitude) होता है| अतः चाल एक अदैशिक राशि (Scalar quantity) है|

माना कोई वस्तु t सेकेंड में s दूरी तय करती है तो वस्तु 1 सेकेंड में दूरी तय करती है। अत: चाल का परिमाण = s / t

वस्तु की चाल (Speed) = वस्तु द्वारा तय कुल दूरी /कुल समय

चाल की इकाई (Units of Speed) : C.G.S. प्रणाली में चाल की इकाई सेंटीमीटर/सेकेंड (cm/s) तथा M.K.S. तथा S.I. प्रणाली में चाल की इकाई मीटर / से० (m/s.) है।

4. समरूप चाल , परिवर्तित चाल और औसत चाल कहने से क्या समझते हैं?

समरूप चाल (Uniform Speed) :- यदि कोई गतिशील वस्तु किसी समान समय-अंतराल (Interval of time) में सदैव समान दूरी तय करती है, तो उसकी चाल को समरूप चाल (Uniform speed) कहते हैं।

 जैसे :- यदि कोई वस्तु 2 घंटे में 20 किलोमीटर जाती है। यदि बाद के 2 घंटे में भी वह 20 किलोमीटर जाये तो उसकी चाल समरूप कही जायेगी।

परिवर्तित चाल (Variable speed) :- यदि कोई गतिशील वस्तु किसी समान समयांतर में समान दूरी तय नहीं करती है तो उसकी चाल परिवर्तित चाल (Variable speed) कहलाती है।

औसत चाल (Average Speed):- किसी वस्तु में परिवर्तित चाल के औसत मान को औसत चाल (Average speed) कहते हैं।

यदि कोई वस्तु t1 समय में S1 दूरी, t2 समय में S2 दूरी और t3 समय में S3 , दूरी तय करती है तो

उस वस्तु की औसत चाल = कुल तय की गई दूरी /कुल लगा समय = ( S+ S2   + S3 ) /  ( t+ t2   + t3 )

5. वेग (Velocity) किसे कहते हैं? समझाओ। इसकी इकाई लिखिए।

वेग (Velocity):- किसी गतिशील वस्तु द्वारा किसी निश्चित दिशा में इकाई समय में तय की गयी दूरी को उस वस्तु का वेग (Velocity) कहते हैं।

इसमें मान तथा दिशा दोनों का बोध होता है। अतः यह एक दैशिक राशि (Vector quantity) है।

उदाहरण – यदि कोई ट्रेन पश्चिम दिशा में 3 घंटा में 180 कि.मी. दूरी तय करती है तो वह एक घण्टे में 180 / 3  कि.मी. = 60 कि.मी. प्रतिघण्टा पश्चिम दिशा की ओर ।  

वेग = वस्तु द्वारा निश्चित दिशा में तय की गई दूरी / कुल दूरी को तय करने में लगा समय

       = विस्थापन / समय = विस्थापन परिवर्तन की दर

अत: विस्थापन परिवर्तन की दर को भी वेग कहते हैं । (The rate of change of displacement of a body is called its velocity.)

वेग की इकाई (Units of Velocity) :-

C.G.S. प्रणाली में वेग (Velocity)की इकाई सेंटीमीटर/सेकेंड (cm/s) तथा M.K.S. तथा S.I. प्रणाली में वेग (Velocity) की इकाई मीटर / से० (m/s.) है।

6. समरूप वेग, परवर्ती वेग और औसत वेग कहने से क्या समझते हैं?

समरूप वेग (Uniform Velocity) :- जब कोई गतिशील वस्तु किसी निश्चित दिशा तथा समान समयांतराल (Interval of time) में समान दूरी तय करती है तो उस वस्तु का वेग समरूप वेग (Uniform Velocity) कहलाता है।

जैसे- कोई टैक्सी किसी निश्चित दिशा में पहले एक घंटे में 20 कि०मी०, दूसरे घंटे में 20 कि०मी० एवं तीसरे घंटे में भी 20 कि०मी० दूरी तय करे तो टैक्सी का वेग समरूप वेग (Uniform Velocity) कहलायेगा क्योंकि टैक्सी का वेग सदैव 20 कि०मी० प्रति घंटा है।

परवर्ती वेग (Variable Velocity) :- जब कोई वस्तु समान समय अंतराल में किसी निश्चित दिशा में असमान दूरी तय करें अथवा समान समय-अंतराल में समान दूरी भिन्न-भिन्न दिशाओं में तय करे, तो उसका वेग परवर्ती वेग (Variable Velocity) कहलाता है।

जैसे— कोई मोटरगाड़ी पहले घंटे में 20 कि०मी०, दूसरे घंटे में 30 कि०मी० एवं तीसरे घंटे में 40 कि०मी० दूरी किसी निश्चित दिशा में तय करे तो वह मोटरगाड़ी का परवर्ती वेग कहलायेगी।

औसत वेग (Average Velocity) :- किसी वस्तु का औसत वेग वह समरूप वेग है जिससे वस्तु किसी निश्चित समय में उतनी ही दूरी तय करती जितनी दूरी परिवर्ती वेग से चलकर उतने ही समय में तय करेगी।

अत: औसत वेग = वस्तु द्वारा तय की गई कुल दूरी / उस दूरी को तय करने में लगा समय

जैसे—कोई मोटरगाड़ी पहले, दूसरे तथा तीसरे घंटे में क्रमशः 20 कि०मी०, 30 कि०मी० तथा 40 कि०मी० दूरी तय करे तो मोटरगाड़ी का औसत वेग =  = 30 कि०मी० / घंटा

7. चाल (Speed) और वेग (Velocity) में अंतर लिखो।

चाल (Speed)

वेग (Velocity)

  1. किसी गतिशील वस्तु द्वारा इकाई समय में किसी भी दिशा में तय की गई दूरी चाल कहलाती है ।
  2. यह एक अदैशिक (Scalar) राशि है ।
  3. इसके द्वारा केवल मान का बोध होता है ।
  1. किसी गतिशील वस्तु द्वारा इकाई समय में किसी निश्चित दिशा में तय की गई दूरी वेग कहलाती है ।
  2. यह एक दैशिक (Vector) राशि है ।
  3. इसके द्वारा मान तथा दिशा दोनों का बोध होता है।

8. त्वरण (Acceleration) किसे कहते हैं? समझाओ। इसकी इकाई लिखिए।

त्वरण (Acceleration) :- किसी गतिशील वस्तु के वेग परिवर्तन की दरका त्वरण (Acceleration) कहते हैं। अर्थात् इकाई समय में किसी गतिशील वस्तु के में जो वृद्धि होती है, उसे त्वरण कहते हैं।

चूँकि त्वरण, वेग-वृद्धि की दर है और वेग एक दैशिक (Vector) राशि है। इसलिए त्वरण भी एक दैशिक (Vector) राशि है। निश्चित त्वरण से गतिशील किसी वस्तु का प्रारंभिक वेग u एवं t समय पश्चात् अंतिम वेग V होने पर

 वस्तु का त्वरण (f) = वेग में परिवर्तन / समय

                              = ( अंतिम वेग  – प्रारंभिक वेग ) / समय

 f = ( v – u ) /t

त्वरण की इकाई (Units of acceleration) :- C.G.S. system में त्वरण की इकाई से.मी./से. तथा M.K.S. या S.I. system में त्वरण की इकाई मीटर/सेकेण्ड है।

You can read following lattest post of SK Study Point Siliguri (आप SK Study Point Siliguri की निम्नलिखित नवीनतम पोस्ट पढ़ सकते हैं ):-

  1. आइसोटोप , आइसोबार तथा आइसोटोन क्या है ? 
  2. CLASS 9 THEOREMS(कक्षा 9 के प्रमेय) 
  3. प्रतिवेदन (Hindi Report Writing)
  4. Force And Motion (बल और गति)

त्वरण के प्रकार :-  त्वरण के दो प्रकार हैं –

धनात्मक त्वरण तथा ऋणात्मक त्वरण (Positive and negative acceleration)

धनात्मक त्वरण (Positive acceleration):- जब किसी गतिशील वस्तु के वेग में प्रति सेकेण्ड जो वृद्धि होती है उसे धनात्मक त्वरण या त्वरण (Positive acceleration) भी कहते हैं।

यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u एवं t समय के बाद वेग बढ़ कर v हो जाय तो,

वस्तु का त्वरण (f ) = ( v – u ) / t

 उदाहरण- किसी गतिशील वस्तु का प्रारम्भिक वेग 25 से.मी. प्रति सेकेण्ड है। यदि 10 सेकेण्ड बाद उसका वेग 55 से.मी. प्रति सेकेण्ड हो जाता है।

वस्तु का त्वरण = ( 55 – 25 ) / 10  = 30/10 = 3 से.मी./से2.

मोटरगाड़ी में Accelerator द्वारा त्वरण उत्पन्न किया जाता है।

ऋणात्मक त्वरण (Negative acceleration) या मन्दन (Retardation):- जब किसी गतिशील वस्तु के वेग में प्रति सेकेण्ड जो कमी या ह्रास होती है उसे ऋणात्मक त्वरण या मन्दन (Retardation) कहते हैं।

 मंदन की इकाई भी त्वरण की इकाई जैसी होती है तथा यह भी एक दैशिक राशि (Vector quantity) है ।

यदि किसी वस्तु का प्रारम्भिक वेग u एवं t समय के बाद वेग घट कर v हो जाय तो,

वस्तु का मंदन (f ) = ( u – v ) / t

उदाहरण- किसी गतिशील वस्तु का प्रारम्भिक वेग 55 से.मी. प्रति सेकेण्ड है। यदि 10 सेकेण्ड बाद उसका वेग 25 से.मी. प्रति सेकेण्ड हो जाता है।

वस्तु का मंदन = ( 25 – 55 ) / 10  = – 30/10 = – 3 से.मी./से2.

मंदन गाड़ी में ब्रेक के द्वारा उत्पन्न किया जाता है ।

NOTE:

स्टेशन छोड़ते समय ट्रेन के वेग में क्रमशः वृद्धि होती जाती है अर्थात् ट्रेन के वेग में धनात्मक त्वरण (Positive acceleration) उत्पन्न होता है। दूसरे स्टेशन पर खड़ी होने के पहले उसमें क्रमशः वेग में ह्रास उत्पन्न होता है, अर्थात् ऋणात्मक त्वरण (Negative acceleration) उत्पन्न होता है।

10. त्वरण (Acceleration) और मंदन (Retardation) में अंतर लिखो।

त्वरण (Acceleration)

मंदन (Retardation)

  1. वेग वृद्धि के दर को त्वरण कहते हैं।
  2. त्वरण होने पर एक निश्चित समय के पश्चात् वस्तु के वेग में वृद्धि होगी।
  3. मोटरगाड़ी में Accelerator द्वारा त्वरण उत्पन्न किया जाता है।
  4. इसे धनात्मक त्वरण कहते हैं।
  1. वेग ह्रास के दर को मंदन कहते हैं।
  2. मंदन होने पर एक निश्चित समय केपश्चात् वस्तु के वेग कमी आएगी।
  3. मोटरगाड़ी में Brake के द्वारा मंदन उत्पन्न किया जाता है।
  4. इसे ऋणात्मक त्वरण कहते हैं।

11. समरुप त्वरण (Uniform acceleration) और असमरूप त्वरण (Non uniform acceleration) कहने से क्या समझते हैं?

समरुप त्वरण (Uniform acceleration) :- जब किसी वस्तु के वेग में बराबर अंतराल में, चाहे समय अंतराल कितना ही छोटा क्यों न हो, बराबर परिवर्तन होता है तो उसके त्वरण को समरूप त्वरण (Uniform acceleration) कहते हैं।

 उदाहरण के लिए हम सीधी सड़क पर विराम से चलती गाड़ी को लेते हैं। प्रारंभ में उसका देगा शुन्य है, क्योंकि गाड़ी विराम से चलना शुरू करता है। माना कि गाड़ी का देस 1 सेकेंड के बाद 15m 2 सेकेंड के बाद 30m/s है. 3 सेकेंड के बाद 45m/s है और आगे भी ऐसा ही है। अतः प्रति सेकेंड गाड़ी का ढंग 15m/s से चलता है अर्थात् गाड़ी का समरूप त्वरण 15m/s है, बस एक सेकेंड के छोटे अंश में भी वेग केपरिवर्तन की दर भी समान हो।

असमरूप त्वरण (Non uniform acceleration):- जब किसी वस्तु में बराबर समय अंतराल में चाहे समय अंतराल कितना ही छोटा क्यों न हो, बराबर परिवर्तन नहीं होता है तो उसका त्वरण असमरूप त्वरण (Non uniform acceleration) कहा जाता है। दोलक (Pendulum) पर कार्य करने वाला त्वरण असमरूप त्वरण होता है।

Algebraic And Graphical Representation Of Motion

In this Post, SK Team will provide you the full study materials on Algebraic And Graphical Representation Of Motion under the second chapter FORCE And MOTION.

इस पोस्ट में, SK टीम आपको गति का बीजगणितीय और आलेखीय निरूपण(Algebraic And Graphical Representation Of Motion) पर पूरी अध्ययन सामग्री(STUDY MATERIALS) प्रदान करेगी।

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