Measurement And Units
MEASUREMENT AND UNITS

किसी दी हुई राशि की उसके मात्रक से तुलना करने की क्रिया को मापन/ Measurement कहते हैं। Measurement की शर्तें के लिए दो बातों पर ध्यान देने की आव्यशकता होती है :- 1. मापक मात्रक जो मानक अथवा सर्वमान्य हो। 2. संख्यात्मक मान जो यह दर्शाता है कि अज्ञात राशि की मानक मात्रक कितनी बार शामिल है।

Measurement क्या है ? Measurement and Units के बारे में भी पूरी जानकारी पाने के लिए इस मेज़रमेंट (Measurement) वाले चैप्टर को पढ़ना होगा। और मापन (Measurement) आधारित प्रश्नोत्तर को पढ़िए जो परीक्षा में आते हैं। अतः यहाँ क्लिक करें। 

1.1 मापने की पद्धतियां एवं माप के यंत्र

1. भौतिक राशियां(Physical Quantity) कहने से क्या समझते हैं?

भौतिक राशियां(Physical Quantity)- वे राशियाँ जिनका माप-तौल ज्ञात किया जा सकता है, भौतिक राशियां कहलाते हैं।

 जैसे:- लंबाई, मात्रा,भार, आयतन, क्षेत्रफल, वेग, त्वरण, समय, बल, कार्य इत्यादि ।

याद रहे कि एक पात्र में रखे पानी की माप (Measurement) की जाती है, पर पानी भौतिक राशि नहीं है, बल्कि पानी का आयतन, जिसे मापा जाता है भौतिक राशि है। इसी प्रकार किसी कमरे की लंबाई, चौड़ाई एवं ऊंचाई की माप(Measurement) की जा सकती है। अतः लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई भौतिक राशि हैं, जबकि कमरा स्वयं भौतिक राशि नहीं है।

2. भौतिक राशियां कितने प्रकार की होती हैं? उदाहरण सहित उनकी परिभाषा लिखो ।

भौतिक राशियों के प्रकार:- भौतिक राशियां दो प्रकार की होती हैं ।

अदैशिक राशियां(Scalar Quantities):- वे भौतिक राशियां जिनमें केवल  परिमाण(magnitide) होता है, किंतु दिशा नहीं होती है, अदैशिक(अदिश) राशियां कहलाती हैं।

जैसे:- लंबाई(Length), मात्रा(Mass), समय(Time), चाल(Speed), कार्य(Work),  क्षेत्रफल(Area), आयतन(Volume), तापक्रम(Temperature), घनत्व(Density), ऊर्जा(Energy) आदि।

 दैशिक राशियां(Vector Quantity):- वे भौतिक राशियां जिनमें परिमाण(magnitude) एवं दिशा(direcion) दोनों होते हैं, दैशिक(सदिश) राशियां कहलाती हैं।

जैसे:- भार(Weight), वेग(Velocity), विस्थापन(Displacement),  बल(Force) आदि।

3. इकाई किसे कहते हैं? समझाओ।

इकाई:- किसी भी भौतिक राशि को मापने हेतु उसी तरह की एक सुविधाजनक एवं प्रमाणिक राशि जिसके द्वारा उस भौतिक राशि की माप संपूर्ण रूप से व्यक्त की जाती है, उसे इकाई कहते हैं।

 प्रायः प्रत्येक राशि (कुछ को छोड़कर) की माप में एक संख्यात्मक हिस्सा होता है जो बताता है कि वह भौतिक राशि में इकाई दूसरा हिस्सा कितनी बार शामिल हुई है।

 जैसे- 20 किलो चीनी और 20 लीटर दूध में, 20 प्रथम हिस्सा 20 संख्यात्मक और दूसरा हिस्सा किलो और लीटर क्रमशः मात्रा तथा आयतन की इकाई का भाग है।

व्याख्या:-

(1) एक छड़ की लंबाई 5 मीटर है। इसका तात्पर्य है कि लंबाई की इकाई या प्रमाणिक मान मीटर है जो इस छड़ में 5 बार शामिल है या छड़ मीटर की 5 गुनी है।

(2) 10 किलोग्राम दाल कहने का तात्पर्य है कि मात्रा की इकाई किलोग्राम में तथा संपूर्ण दाल का परिमाण किलोग्राम का 10 गुना है।

4. इकाई की क्या प्रयोजनीयता है?

इकाई की प्रयोजनीयता:- इकाई के बिना किसी भी राशि का माप संभव नहीं है और न तो उस राशि के यथार्थ मान का ही बोध होता है। प्रायः भौतिक राशियों की इकाई होती है। लेकिन जो भौतिक राशियां दो समान भौतिक राशियों का अनुपात होती है, उनकी कोई इकाई नहीं होती है। जैसे-  विशिष्ट गुरुत्व(Specific Gravity), परमाणु-भार(Atomic weight), अणुभार(Molecular weight) आदि।

5. इकाई का महत्व बताओ।

इकाई का महत्व:-

1) किसी भी भौतिक राशि के यथार्थ परिमाण के लिए इकाई आवश्यक है।

2) इकाई के बिना किसी भी भौतिक राशि को मापना संभव नहीं है।

3) इकाई विहीन परिमाण का कोई महत्व नहीं है।

6. सभी भौतिक राशियों की इकाई नहीं होती है।व्याख्या करें ।

सभी भौतिक राशियों की इकाई नहीं होती है।

 प्रायः प्रत्येक भौतिक राशि के एक निश्चित इकाई होती है। परंतु कुछ भौतिक राशि एक ही तरह की दो भौतिक राशियों के अनुपात के रूप में व्यक्त की जाती हैं। चूँकि अनुपात एक संख्या होती है। अतः उनकी अपनी कोई इकाई नहीं होती है।

जैसे-  विशिष्ट गुरुत्व(Specific Gravity), परमाणु-भार(Atomic weight), अणुभार(Molecular weight),आपेक्षिक घनत्व(Relative Densiry), विशिष्ट उष्मा(Specific Heat), आपेक्षिक आर्द्रता(Relative Humidity), घुलनशीलता(solubility) आदि।

7. इकाई के प्रकार के बारे में क्या जानते हो?

इकाई के प्रकार:-

मौलिक इकाइयां(Fundamental Units / Primary Units):- वे इकाइयां जो एक दूसरे से बिल्कुल स्वतंत्र होती हैं तथा इन इकाइयों से समस्त भौतिक राशियों की इकाइयां गठित की जाती हैं, मौलिक इकाइयां कहलाती हैं।

 जैसे:- लंबाई, मात्रा,समय, तापमान, विद्युत धारा, प्रकाश की तीव्रता आदि की इकाइयां मौलिक(मूल) इकाई है।

व्युत्पन्न इकाइयां (Derived Units / Secondary Units):- वे इकाइयां जो दो या दो से अधिक मौलिक इकाइयों से निकलती है और उन्हीं के रूप में प्रकट की जाती है, व्युत्पन्न इकाइयां कहलाती हैं ।

जैसे:- क्षेत्रफल, आयतन, घनत्व, त्वरण, वेग आदि की इकाइयां।

उदाहरण के लिए त्वरण की इकाई मीटर/सेकंड 2 है जो लंबाई की इकाई मीटर और समय की इकाई सेकंड के द्वारा व्यक्त की जाती है। यहां मीटर और सेकंड दोनों ही मौलिक इकाइयां हैं।

8. मूल इकाइयों के मापने की विभिन्न पद्धतियां के बारे में क्या जानते हो?

मूल इकाइयों के मापने की विभिन्न पद्धतियां:- मूल (मौलिक) इकाइयों को व्यक्त करने के लिए जो पद्धतियां काम में लाई जाती हैं, उन्हें मापन की पद्धतियां(Systems of measurement) कहते हैं। लंबाई, मात्रा और समय की इकाइयां एक साथ मिलकर इकाइयों की मापन(Measurement) पद्धति का निर्माण करती है।  मूल इकाइयों को मापने के लिए निम्नलिखित पद्धतियां प्रचलित हैं:-

1. CGS System (सी.जी.एस. पद्धति)- इस पद्धति में लंबाई की मौलिक इकाई सेंटीमीटर, मात्रा के मौलिक इकाई ग्राम और समय की मौलिक इकाई सेकंड होती है।

2. FPS System (एफ.पी.एस. सिस्टम):- इस पद्धति में लंबाई की मौलिक इकाई फुट, मात्रा की मौलिक इकाई पाउण्ड एवं समय की मौलिक इकाई सेकंड होती है।

3. MKS System (एम.के.एस. सिस्टम):- इस पद्धति में लंबाई की मौलिक इकाई मीटर, मात्रा की मौलिक इकाई किलोग्राम और समय की मौलिक इकाई सेकंड होती है।

4. अंतरराष्ट्रीय इकाई पद्धति (एसआई सिस्टम / S.I. System):- विभिन्न देशों में भौतिक राशियों को मापने के लिए भिन्न-भिन्न इकाइयां प्रयोग में लाई जाती हैं इकाइयों में समानता रखने के लिए सन 1960 ई. में सर्वग्राही एक पद्धति का प्रचलन किया गया जिसे अंतरराष्ट्रीय इकाई पद्धति [एस. आई. यूनिट(SI Unit) ] कहते हैं। यह एम.के.एस. पद्धति(MKS System) का संशोधित रूप है। एस आई पद्धति में इकाइयों का प्रयोग करने में सुविधा यह है कि छोटी से बड़ी इकाई बड़ी से छोटी इकाई प्राप्त करने में सुविधा होती है और प्रत्येक इकाई एक दूसरे के दशान्श(1/10) या 10 गुनी बड़ी होती है ।

 एस आई पद्धति में लंबाई, मात्रा और समय की इकाइयां के साथ विद्युत प्रवाह, तापक्रम, प्रकाशिय तीव्रता और वस्तु परिमाण की इकाइयों को मौलिक इकाई के रूप में स्वीकृत किया गया है अर्थात 7 मौलिक इकाइयां हैं जिनके नाम इकाई तथा उनका संकेत निम्नलिखित है:-

1. लंबाई -मीटर (m), 2. मात्रा- किलोग्राम (Kg), 3. समय- सेकंड(s), 4. विद्युत धारा- एंपियर(A), 5. तापक्रम- केल्विन(K) 6. प्रकाशीय तीव्रता(शक्ति)- कैंडेला(Cd), 7. पदार्थ का परिमाण- मोल(Mol)

9. लीटर (Litre) क्या है?

लीटर (Litre):- 4 डिग्री सेल्सियस(4°C) पर एक किलोग्राम शुद्ध जल का जो आयतन होता है, उसे लीटर कहते हैं। लीटर का 1 / 100 वा भाग मिलीलीटर होता है।

भिन्न-भिन्न तापक्रम पर जल का घनत्व भिन्न-भिन्न होता है। घनत्व भिन्न होने पर आयतन का मान भी भिन्न होगा। इसलिये लीटर के लिये प्रमाणिक तापक्रम 4°C लिया गया है। 4°C ही लिये जाने का यह कारण है कि इस तापक्रम पर जल का घनत्व सर्वाधिक होता है। अतः लीटर की व्याख्या करने में 4°C तापक्रम का उल्लेख करना आवश्यक है। 4°C से कम या अधिक तापक्रम होने पर घनत्व का मान कम हो जाता है। फलस्वरूप किसी अन्य तापक्रम पर 1 Kg जल का आयतन 1 लीटर जल के आयतन से अधिक होगा।

1.2 सूक्ष्मदर्शी या और वृहद परिमाण वाले राशियों को मापने के लिए विभिन्न इकाइयों के प्रयोग का कारण

10. एक ही राशि को मापने के लिए छोटी और बड़ी इकाइयों के प्रयोग का क्या कारण है?

एक ही राशि को मापने के लिए छोटी और बड़ी इकाइयों के प्रयोग का कारण:-

 प्रत्येक माप(measurement) की पद्धति में इसी राशि के छोटी-बड़ी एकाधिक इकाइयां होती हैं। राशि के साथ इकाई के व्यवहार इस बात पर निर्भर करता है कि राशि का परिमाण क्या है क्योंकि राशि का माप (इकाई ×  संख्या) पर निर्भर करता है। इकाई बड़ी होने पर संख्या छोटी होती है और इकाई छोटी होने पर संख्या बड़ी होती है। अतः बड़ी राशि के लिए बड़ी इकाई और छोटी राशि के लिए छोटी इकाई ली जाती है।

उदाहरण के लिए कोलकाता से दार्जिलिंग की दूरी को किलोमीटर में व्यक्त करते हैं। परंतु सेंटीमीटर व्यक्त करना सुविधाजनक नहीं होगा क्योंकि सेंटीमीटर में व्यक्त करने से एक बहुत बड़ा मान प्राप्त होगा जिसे याद रखना और व्यक्त करना दोनों ही कठिन होगा। इसी प्रकार प्रकाश के तरंग की लंबाई और परमाणु  का व्यासार्द्ध इतना छोटा होता है कि उसे मीटर या किलोमीटर में व्यक्त करना कठिन होगा। अतः फर्मी या आगस्ट्रम व्यक्त करना ही सुविधाजनक रहता है।

11. फर्मी क्या है?

 फर्मी (Fermi):- यह परमाणु का व्यास को व्यक्त करने करने में आने वाली छोटी इकाई है।

 1 फर्मी= 10-13 सेंटीमीटर = 10-15 मीटर होता है।

12. अंगस्ट्रोम(Angstrom) क्या है?

अंगस्ट्रोम(Angstrom):- परमाणु एवं अणु के ब्याज तथा अर्धव्यास जैसे छोटे आकार को मापने के लिए अंगस्ट्रोम का प्रयोग किया जाता है। यह एक एक्स रे और प्रकाश की तरंग की लंबाई को भी व्यक्त करने वाली इकाई के रूप में भी प्रयुक्त होता है।

 1 अंगस्ट्रोम = 10-8  सेंटीमीटर =10-10 मीटर होता है।

13. माइक्रोन(Micron) क्या है?

माइक्रोन(Micron):- सूक्ष्मदर्शी(Microscope) से देखी जाने वाली वस्तुओं के आकार, व्यास इत्यादि को व्यक्त करने के लिए माइक्रोन का प्रयोग किया जाता है।

1 micron =10-6 मीटर =10-4 सेन्टीमीटर

14. खगोलीय इकाई(Astronomical Unit) क्या है?

खगोलीय इकाई(Astronomical Unit):- पृथ्वी और सूर्य के बीच की औसत दूरी को जिस इकाई से ज्ञात किया जाता है, ज्योतिषीय(खगोलीय) इकाई कहते हैं।

1A.U. = 14.95 ×108 किलोमीटर

15. प्रकाश वर्ष क्या है?

प्रकाश वर्ष या आलोक वर्ष(Light Year):- शून्य में प्रकाश द्वारा 1 वर्ष में तय की गई दूरी को प्रकाश वर्ष कहते हैं।

1 प्रकाश वर्ष = 9.46×1012 किमी(लगभग )

16. प्रकाश वर्ष का मान को किलोमीटर में व्यक्त करो।

 प्रकाश वर्ष द्वारा 1 वर्ष में तय की गई दूरी= प्रकाश के वेग का मान × 1 वर्ष

=3×108 मीटर/सेकेण्ड ×365×24×60×60 सेकेण्ड

= 3×108 × 365×24×60×60मीटर

=365×24×3600× 3×108 मीटर

= 946080×1010 मीटर

=9.46×1015 मीटर

=9.46×1012 किलोमीटर

= 10 ×1012 किलोमीटर (nearly)

1.3 विमा (Dimension)

1. विमा किसे कहते हैं?

किसी भौतिक राशि के व्युत्पन्न इकाई की विमा उसमें उपस्थित लंबाई, द्रव्यमान(मात्रा) और समय के मौलिक इकाइयों पर घात को उस भौतिक राशि की विमा (Dimension) कहते हैं।

अर्थात किसी भौतिक राशि की इकाई प्राप्त करने के लिए मौलिक इकाइयों को जिन घातों(powes) से उठाना पड़ता है, वे घात ही उस भौतिक राशि की विमा कहलाती हैं।

NOTE: As for example refractive index, specific gravity etc have no unit and so the are all dimensionless. Again angle although has a unit(Radian), it doesnot have dimension.

उदाहरण के लिए अपवर्तनांक, विशिष्ट गुरुत्व आदि की कोई इकाई नहीं है और इसलिए सभी विमारहित हैं। फिर , कोण का एक इकाई (रेडियन) है, पर इसका कोई विमा (dimension) नहीं है।

याद रखें कि इकाई रहित (unitless) भौतिक राशि की विमा नहीं होती है। 

2. विमा लिखने क्या तरीका होता है?

 विमा को हमेशा बड़े कोष्टक [  ] के अंदर लिखा जाता है। किसी भी राशि का विमा यह प्रदर्शित करता है कि उसकी मौलिक इकाइयों पर किस प्रकार आधारित है। विमा लिखने के लिए मौलिक इकाइयों के लिए बड़े अक्षर (Capital Letters) का प्रयोग किया जाता है। जैसे- लंबाई की इकाई [ L ], मात्रा की इकाई [ M ], समय की इकाई[ T ] । अतः इन मौलिक राशियों से व्युत्पन्न राशियों की विमाए निकाली जाती हैं। व्युत्पन्न भौतिक राशियों की इकाइयां लंबाई, मात्रा और समय के मौलिक इकाइयों को उचित घातों (Powers) से उठाकर प्राप्त किए जाते हैं।

3. विमीय सूत्र (dimensional formula) क्या है?

The expression that shows how and which base quantities represent the dimensions is called the dimensional formula.

वह व्यंजक जो दर्शाता है कि कैसे और कौन-सी आधार मात्राएँ विमाओं को निरूपित करती हैं, विमीय सूत्र (dimensional formula) कहलाती है।

जैसे- आयतन का  विमीय सूत्र = [M0  L3 T0 ]

         वेग का  विमीय सूत्र = [M0  L1 T-1 ]

4. विमीय  विमीय समीकरण (dimensional equation ) क्या है?

An equation obtained by a physical quantity with its dimensional formula is called the dimensional equation.

 विमीय समीकरण (dimensional equation ) :- किसी भौतिक राशि द्वारा उसके विमीय सूत्र के साथ प्राप्त समीकरण को विमीय समीकरण कहते हैं।

जैसे- आयतन का विमीय समीकरण    [ V ] = [ M0  L3 T0 ]

         वेग का विमीय समीकरण          [ v ] = [ M0  L1 T-1 ]

5. निम्न राशियों का विमीय सूत्र (Dimensional Formula) लिखिए।

(1) लंबाई(length) (2) मात्रा(mass) (3) समय(time) (4) आयतन (5) घनत्व (6) वेग /चाल (7) संवेग (momentum) (8) त्वरण (acceleration) (9) मंदन (retardation) (10) बल(force) (11) दबाव (pressure)

(1) लंबाई(length) [M0 L1 T0 ]

(2) मात्रा(mass) [M1  L0 T0 ]

(3) समय(time) [M0 L0  T1 ]

(4) आयतन [M0  L3 T0 ]

(5) घनत्व [M1 L-3 T0 ]

(6) वेग /चाल [M0  L1 T-1 ]

(7) संवेग (momentum) [M1 L1 T–1 ]

(8) त्वरण (acceleration) [M0 L1  T-2 ]

(9) मंदन (retardation) [M0 L1  T-2 ]

(10) बल(force) [ML1  T-2 ]

(11) दबाव (pressure) [M1 L-1 T-2 ]

1.4 माप के यंत्र (Measuring instruments)

1. मापक यंत्र क्या है?

 किसी राशि के परिमाण का ठीक-ठीक मापन(Measurement) के लिए जिस सुविधाजनक यंत्र की आवश्यकता होती है, उसे मापक यंत्र कहते हैं।

जैसे- लंबाई की माप साधारण स्केल (Measuring Cylinder) द्वारा, आयतन की माप नापना बेलन(Measuring Cylinder) द्वारा, मात्रा की माप साधारण तुला(Common Balance) द्वारा एवं भार की माप कमानीदार तुला(Spring Balance) द्वारा करते हैं। समय के ज्ञान के लिए दिवाल घड़ी(Clock) और विराम घड़ी(Stop Watch) का प्रयोग किया जाता है।

2. विस्थापनाभास-त्रुटि(Parrallax Error) क्या है? इसको दूर करने का क्या उपाय है?

साधारण स्केल द्वारा किसी वस्तु की लंबाई मापने के समय आंख की स्थिति ठीक बिंदु के ऊपर बिल्कुल लंबवत होना चाहिए। यदि आंखें स्थिति वास्तविक  बिंदु से बाई या दाई ओर होगी तो मान ठीक मान से अधिक या कम प्राप्त होगा। इस श्रुति को विस्थापनाभास-त्रुटि(Parrallax Error) कहते हैं।

विस्थापनाभास-त्रुटि(Parrallax Error)को दूर करने का उपाय:-

  1. स्केल का पठान लेते समय आंख की स्थिति पाठक के लंबवत होना चाहिए।

3. शून्य त्रुटि (Zero Error) क्या है?

सामान्यतः स्केल का किनारा थोड़ा घिसा रहता है जिससे शुन्य का अंक कट जाता है। इस कारण लंबाई का मान ठीक-ठीक ज्ञात नहीं हो पाता है। अतः इस त्रुटि से बचने के लिए रेखा की लंबाई मापते समय स्केल को शून्य को छोड़कर कोई अन्य पूणाङ्क  पाठ्याङ्क(reading) रख कर स्केल को सरल रेखा के समानांतर रखते हैं। दोनों बिंदुओ के सामने का पठन ज्ञात करते हैं। दोनों पठ्याङ्को का अंतर निकाल लेते हैं जो रेखा की लंबाई होती है।

4. अल्पतमांक(Least Count) क्या है?

 किसी भी मापक यंत्र द्वारा जो कम से कम पाठ्य अंक (reading) प्रमाणिक रूप से लिया जाता है, वह उस यंत्र का अल्पतमांक(Least Count) कहलाता है।

उदाहरण के लिए साधारण स्केल का अल्पतमांक एक मिलीमीटर(1 mm) या 0.1 सेंटीमीटर (0.1 cm ) होता है और वर्नियर कैलिपर्स (Vernier Callipers) में अल्पतमांक(Least Count)  0.01 सेमी होता है।

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  5. Mathematics Theorems 

5. बाट बॉक्स(Weight-Box) में बाट (weights) की मात्रा का अनुपात 5:2:2:1 होने का क्या कारण है?

 वाट बॉक्स(Weight Box) में रखे वजन(weight) का अनुपात 5:2:2:1 में होने का कारण 1 से 10 के किसी भी परिमाण में वस्तु हो, बॉक्स में रखे बाट(weights) की सहायता से तुलना संभव है।

 जैसे- 1, 2, (2+1)=3, (2+2)=4, 5, (5+1)=6, (5+2)=7, (5+2+1)=8,(5+2+2)=9 तथा (5+2+2+1)=10 आदि।

इस कारण इनकी सहायता से किसी भी मान को प्राप्त किया जा सकता है।

इसलिए वाट बॉक्स में रखे बांटो का क्रमिक अनुपात 5:2:2:1 होता है।

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  4. Force And Motion (बल और गति)

6. एक अच्छी तुला की कौन-कौन सी विशेषताएं होती हैं?

एक अच्छी तुला की विशेषताएं(Requisites of a good balance):-

  1. सत्यता(Truthfulness)
  2. सुग्राहीता(Sensitivity)
  3. स्थायित्व ( Stability)
  4. दृढ़ता (Rigidly)

7. किसी पिंड (वस्तु) के द्रव्यमान को मापने के लिए, सामान्य-संतुलन का उपयोग किया जाता है। क्यों?

साधारण तुला से मात्रा ज्ञात करते समय बाएं पलड़े पर वस्तु को तथा दाहिने पलड़े पर बाट को रख कर तुला को संतुलित कर लेते हैं। इस समय वस्तु तथा बाट दोनों पर गुरुत्व बल समान रूप से लगता है।

तुला के साम्यावस्था में होने पर वस्तु पर क्रियाशील गुरुत्व बल = बाट पर क्रियाशील बल या, वस्तु की मात्रा x g = बाट की मात्रा x g

या, वस्तु की मात्रा = बाट की मात्रा

अतएव, किसी वस्तु की मात्रा का मापन करने के लिये साधारण तुला का प्रयोग किया जाता है।

8. प्लास्टिक या लकड़ी से बने साधारण पैमाने को धातु की तुलना में पसंद किया जाता है। क्यों ?

धातु उष्मा का सुचालक है। तापक्रम के घटने-बढ़ने से Scale की लम्बाई भी घटती बढ़ती है। इसी से धातु के Scale का प्रयोग वर्जित है। किन्तु प्लास्टिक या लकड़ी, उष्मा का कुचालक है। इस पर उष्मा का प्रभाव नहीं पड़ता। यही कारण है कि धातु से बने Scale की तुलना में लकड़ी या प्लास्टिक का बना Scale उत्तम माना जाता है।

9. काँच के केस के अंदर एक साधारण तुला क्यों रखा जाता है?

एक सामान्य संतुलन की पूरी व्यवस्था एक लकड़ी के बक्से में संलग्न होती है जिसमें कांच की खिड़कियां होती हैं ताकि उपकरण को वायु धाराओं(air currents) से बचाया जा सके जो अन्यथा माप को खतरे(jeopardize) में डाल सकता है।

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