Periodic Table
Periodic Table

इस पोस्ट में आप वेस्ट बंगाल बोर्ड ऑफ़ सेकेंडरी एजुकेशन(WBBSE) के अंतर्गत Class 10 पढ़ना चाहते हैं तो आप सही पोस्ट को देख रहे हैं। Periodic Table (पीरियाडिक टेबल) , जो Physical Science (भौतिक विज्ञान) का Chemistry (केमिस्ट्री) का एक चैप्टर है , उस पर आप डिटेल ज्ञान प्राप्त करेंगे। साथ में महत्वपूर्ण प्रश्नों को भी पाएंगे ।

त्रियक सिद्धांत(Law Of Triads):- सन 1917 ईस्वी में जर्मन वैज्ञानिक जे.डब्ल्यू. डोबेरीनर ने तत्वों के परमाणु भार ओ का अध्ययन करके एक नियम प्रतिपादन किया जिसे जे.डब्ल्यू. डोबेरीनर का त्रियक सिद्धांत ( Dobereiner’s Law Of Triads) का नियम कहा जाता है। इसके अनुसार “यदि समान गुण वाले तीन तत्वों को परमाणु-भार के वृद्धि क्रम में रखा जाए तो बीच के तत्व का परमाणु-भार पहले और तीसरे के परमाणु-भारो का लगभग माध्य(Mean) होता है।

न्यूलैंड का अस्टक का नियम (Newland’s Law Of Octave):-  सन 1864 ईस्वी में अंग्रेज वैज्ञानिक ए. आर. न्यूलैंड ने तत्वों के वर्गीकरण के संबंध में अनुसंधान करते हुए यह पाया कि जिस प्रकार संगीत के सुरों (सा, रे, गा, मा, पा, धा, नि,- सा) में प्रत्येक आठवां सुर प्रथम सूर के समान होता है। ठीक उसी प्रकार, आठवें तत्वों का गुण पहले तत्वों के गुणों के समान होते हैं । उन्होंने इसे ‘अस्टक का नियम’ दिया।

इस नियम के अनुसार “यदि तत्वों के उनके परमाणु-भार के वृद्धि-क्रम में सजाया जाए तो किसी विनिर्देश तत्व से गिनना प्रारंभ करने पर उसके बाद का आठवां तत्व प्रथम तत्व के गुणों से समानता रखता है।”

तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुण उनके परमाणु द्रव्यमान(atomic mass) के आवर्त फलन(Periodic function) होते हैं अर्थात यदि तत्वों को उनके परमाणु-द्रव्यमान(atomic mass) के वृद्धि-क्रम में रखा जाए तो वे तत्व जो समान गुण वाले होते हैं एक निश्चित अवधि(interval) के पश्चात आते हैं।

 आवर्त नियम के अनुसार तत्वों को उनके परमाणु द्रव्यमान के वृद्धि-क्रम में सजाकर विभिन्न तत्वों को विभिन्न श्रेणियों में विभाजित करने को आवर्ती-वर्गीकरण(Periodic-Classification) कहते हैं।

आवर्त नियम का पालन करते हुए विभिन्न तत्वों को उनके परमाण्विक-द्रव्यमान(atomic-mass) के बढ़ते हुए क्रम में सजाए जाने के फलस्वरूप जो सारणी या तालिका(Table) प्राप्त होती है उसे आवर्त सारणी कहते हैं। आवर्त नियम पर आधारित होने के कारण इसे मेंडलीफ का आवर्त सारणी(Mendeleef’s Periodic Table) भी कहते हैं।

आवर्त तत्वों को उनके परमाणु संख्या किए वृद्धि के क्रम में सजाकर रखने पर सारणी में कुछ क्षैतिज (Horizontal) पंक्तियां प्राप्त होती हैं। आवर्त सारणी में स्थित क्षैतिज तालिकाओं  को आवर्त या पीरियड्स(Periods) कहते हैं। आवर्त सारणी में कुल 7 आवर्त हैं। प्रत्येक आवर्त के तत्व का परमाणु संख्या और गुण भिन्न भिन्न होते हैं। आवर्तों को 1, 2, 3, ….. 7  के रूप में प्रदर्शित किया जाता है।

आवर्त सारणी में तत्वों को उनके परमाणु संख्या के वृद्धि क्रम में एक-एक करके क्षैतिज कतारों में सजाने पर देखा जाता है कि समान गुण वाले सभी तत्व एक ही ऊर्ध्वाधर(Vertical) तालिका में उपस्थित रहते हैं। आवर्त सारणी में ऊपर स्थित ऊर्ध्वाधर तालिकाओं को वर्ग या श्रेणी(Group) कहते हैं। प्रत्येक वर्ग में उपस्थित तत्व के गुण समान होते हैं।

मेंडलीफ के आवर्त सारणी में  8 वर्ग हैं। आधुनिक आवर्त सारणी में कुल 9 वर्ग हैं जबकि दीर्घ आवर्त सारणी में 18 वर्ग हैं।

Note:-

मेंडलीफ के आवर्त सारणी(Mendeleef’s Periodic Table) में 8 वर्ग और 7 आवर्त हैं ।

आधुनिक आवर्त सारणी( Modern Periodic Table) में कुल 9 वर्ग और 7 आवर्त हैं ।

 दीर्घ आवर्त सारणी(Long Form Periodic Table) में 18 वर्ग और 7 आवर्त हैं ।

अथवा, आधुनिक आवर्त नियम(Modern Periodic Law) लिखिए।

मेंडलीफ के आवर्त नियम का संशोधित रूप (आधुनिक आवर्त नियम):- तत्वों के भौतिक व रासायनिक गुण उनके परमाणु संख्या(Atomic Number) के आवर्ती-फलन (Periodic functions) होते हैं अर्थात यदि तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु-संख्या के क्रम में रखा जाए तो वे तत्व जिनके गुण समान होते हैं, एक निश्चित अंतर के बाद आते हैं।

आवर्तता(Periodicity) का कारण:- तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु संख्या(atomic number) के आधार पर सजाने से एक निश्चित अवधि(interval) के पश्चात उनके बाहरी कक्ष(shell) में समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की पुनरावृति होती है। इस पुनरावृति के कारण ही तत्व के गुणों में आवर्तता पाई जाती है।

यद्यपि रसायन विज्ञान में मेडलिफ की आवर्त सारणी के योगदान  अद्वितीय हैं, किंतु फिर भी इसमें कुछ त्रुटियां हैं जो निम्न है-

(i) आवर्त नियम की असंगति

(ii) आइसोटोप का स्थान विभिन्न गुण वाले तत्वों का एक ही वर्ग में अवस्थान(position) देना

(iii) समान गुण वाले तत्वों का विभिन्न वर्गों में स्थान देना (iv) आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का विवादास्पद स्थान ।

आवर्त सारणी की उपयोगिता:-

1. आवर्त सारणी की मदद से अध्ययन में सुविधा होती है ।

2. नए तत्वों की खोज करने में मदद मिलती है ।

3. एटॉमिक मास(atomic mass)में संशोधन और सुधार करने में मदद मिलती है।

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  4. Electricity And Chemical Reaction| Physical Science | WBBSE CLASS10
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  8.  

आवर्त सारणी में हाइड्रोजन के स्थान:-  आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान विवादास्पद है। हाइड्रोजन के गुण प्रथम वर्ग (Group-I ) के क्षारीय धातुओं(Li, Na, K) से तो मिलते ही हैं, सातवें वर्ग (Group-VII )के हैलोजन तत्व(F, Cl, Br, I) से भी सादृश्य रखते हैं।

 इस प्रकार हाइड्रोजन को ग्रुप- I और ग्रुप-VII से किसी में भी रखा जा सकता है।

क्षारीय धातुओं के साथ हाइड्रोजन की समानताएं:-

(1) हाइड्रोजन, क्षारीय धातुओं की भांति एक संयोजी(mono valent) तत्व है।

(2) हाइड्रोजन, क्षारीय धातुओं की भांति एक अवकारक(reducing agent) हैं।

(3) हाइड्रोजन, क्षारीय धातुओं की भांति एक विद्युत धनात्मक है।

(4) हाइड्रोजन, क्षारीय धातुओं की भांति संयोजकता एक होती है।

हैलोजन तत्वों के साथ हाइड्रोजन की समानताएं:-

(1) सप्तम वर्ग (Group-VII) के हैलोजन(F, Cl, Br, I) तत्वों की भांति हाइड्रोजन भी एक गैस एवं अधातु है।

(2) सप्तम वर्ग के हैलोजन तत्वों की भांति हाइड्रोजन भी एक द्वी-परमाणवीक(Diatomic) तत्व है।

(3) हैलोजन तत्व, धातु के साथ क्रिया करके हेलाइड- यौगिक का गठन करते हैं । जैसे-NaH

(4) हेलाइड यौगिकों की भाँति हाइड्राइड यौगिक भी आयनीकरण के फलस्वरुप हाइड्रोजन आयन उत्पन्न करते हैं।

 फ्लोरीन, क्लोरीन, ब्रोमीन और आयोडीन तत्वों को हैलोजन कहा जाता है। ये हैलोजन तत्व आवर्त सारणी में 7  B वर्ग में रखा गया है। इन्हें एक ही वर्ग में रखने का कारण यह है कि इनके गुणों में प्रचुर समानता पाई जाती है जो निम्न है –

  1. इनमें से कोई भी तत्व प्रकृति में मुक्त अवस्था में नहीं पाया जाता है। प्रत्येक तत्व प्रकृति में यौगिकों के रूप में संयुक्त अवस्था में पाया जाता है।
  2. इनमें से प्रत्येक तत्व द्वि-परमाणविक(diatomic) होते हैं।
  3. तत्व के रूप में इनके अणु रंगीन(coloured)होते हैं ।
  4. प्रत्येक तत्व ऋण-आवेशित अधातु है और इनमें से प्रत्येक तत्व तीव्र ऑक्सीकारक की भांति व्यवहार करता है।
  5. इनकी संयोजकता शून्य होती है और इन तत्वों को आवर्त सारणी के 0 वर्ग (Group-18) में रखा गया है।

 आवर्त/वर्ग  की प्रमुख विशेषताओं में से तीन विशेषताएं निम्न है- 1. परमाणु का आकार(Atomic Size) , 2. धात्विक गुण(Metallic Character), 3. रासायनिक सक्रियता (Chemical Reactivity) और  4. विद्युत ऋणात्मकता(Electronegativity)

लिनस पालिङ्ग (Linus Pauling) के अनुसार, किसी तत्व की विद्युत ऋणात्मकता(Electronegativity)  उस तत्व के परमाणु की वह क्षमता है जिसके कारण वह साझे की इलेक्ट्रॉन जोड़ी(electron pair) को अपनी ओर आकर्षित करता है।

आवर्त(Period) में परमाणु का आकार(Atomic Size):-

किसी आवर्त में बाएं से दाएं(Left to Right) बढ़ने /चलने पर परमाणुओं की आकार (size) में क्रमशः कमी(decrease) होती जाती है।

[परमाणु के केंद्र से बाहरी कक्ष(outer most shell) के बीच की दूरी को परमाणु की त्रिज्या(atomic radius) कहते हैं। परमाणु का आकार उसकी परमाणविक-त्रिज्या(atomic radius) के द्वारा आंगस्ट्राम (Angstrom) इकाई के रूप में की जाती है।]

यहां दूसरे और तीसरे आवर्त के तत्वों के परमाणुओं के अर्द्धव्यास(atomic radius) निम्न तालिका में दिखाए गए हैं- 

Period 2 & 3
PERIOD 2 AND 3

कारण:- किसी आवर्त में बाएं से दाएं की ओर बढ़ने पर क्रमशः प्रोटोन की संख्या में वृद्धि होती जाती है। केंद्रक में प्रोटोन की संख्या में वृद्धि होने पर इलेक्ट्रॉनों पर लगने वाला आकर्षण बल बढ़ जाता है। फलस्वरूप इलेक्ट्रॉन केंद्र की ओर खींच जाते हैं जिससे केंद्र और बाहरी कक्ष के बीच की दूरी घट जाती है। अर्थात परमाणु की त्रिज्या(Radius) छोटी हो जाती है और परमाणु का आकार भी घट जाता है। यही कारण है कि सोडियम का परमाणु एलुमिनियम से बड़ा है और बेरिलियम का परमाणु लिथियम के परमाणु से छोटा है।

वर्ग(Group) में परमाणु का आकार(Atomic Size):-

आवर्त सारणी में किसी वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर ऊर्ध्वाधर रूप में उतरने पर परमाणुओं के आकार में क्रमश वृद्धि होती जाती है।

 उदाहरण के लिए- वर्ग I A में लिथियम(Li) सबसे छोटा परमाणु है और आयोडीन (I) का परमाणु सबसे बड़ा परमाणु है।

यहां  I A और VII A के तत्वों के परमाणु की त्रिज्या को प्रदर्शित किया गया है :- 

Group I & VII

कारण:-  किसी वर्ग मैं ऊपर से नीचे उतरने पर परमाणु के आकार में वृद्धि होते जाने का कारण उन तत्वों के परमाणु में क्रमशः भैलेंस सेल(valence shell) की संख्या में वृद्धि होते जाना है। ऊपर से नीचे की ओर उतरने पर प्रत्येक कदम पर एक इलेक्ट्रॉनिक कक्ष पहले से अधिक होता जाता है और इलेक्ट्रॉनों का केंद्र की ओर खिंचाव अपेक्षाकृत कम होने लगता है। फलस्वरूप परमाणु के आकार में भी क्रमश वृद्धि होती जाती है। किसी भी वर्ग का सबसे छोटा परमाणु सबसे ऊपर और सबसे बड़ा परमाणु वर्ग से सबसे नीचे के भाग में स्थित रहता है।

17. आवर्त और वर्ग में परमाणु का धात्विक गुण(Metallic Character) और अधात्विक गुण(Non-metallic Character) के बारे में चर्चा करें ।

आवर्त(Period) में परमाणु का धात्विक गुण(Metallic Character)और अधात्विक गुण(Non-metallic Character):-

किसी आवर्त में बाएं से दाएं की ओर बढ़ने पर तत्वों के धात्विक गुणों में क्रमशः कमी होती हैं किंतु आध्यात्मिक गुणों में क्रमश वृद्धि होती हैं किसी आवर्त के बाएं तरफ के तत्व धातु और दाहिनी तरफ के तत्व और धातु होते हैं इन दोनों प्रकार के तत्वों के मध्य में स्थित तत्वों के कुछ गुण धातुओं से और कुछ गुण और धातुओं से मिलते हैं ऐसा तत्व उपधातु की श्रेणी में आते हैं।

 जैसे- आवर्त 2 में लिथियम(Li), बेरिलियम(Be) तत्व धातु हैं तथा कार्बन(C), नाइट्रोजन(N), ऑक्सीजन(O) और फ्लोरीन(F) अधातु में जबकि मध्य में स्थित तत्व बोरन(B) एक उपधातु (metalloid) है। दूसरी ओर आवर्त 3 में सोडियम(Na), मैग्निशियम(Mg), एलुमिनियम(Al) तत्व धातु हैं तथा फास्फोरस(P), सल्फर(S) और क्लोरीन(Cl) अधातु(non metal) तो है जबकि मध्य में स्थित सिलिकॉन(Si) एक उपधातु है।

Period 2 & 3 metal metalloid nonmetal
Period 2 & 3 Metal, Metalloid & Nonmetal

वर्ग(Group) में परमाणु का धात्विक गुण(Metallic Character) और अधात्विक गुण(Non-metallic Character) -

 आवर्त सारणी में किसी धातु वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर उतरने पर तत्वों के धात्विक गुणों में क्रमशः वृद्धि होती जाती है लेकिन किसी अधातु वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर उसके अधात्विक गुण घटते हैं। अतः किसी आवर्त में बाएं तरफ धातुओं और दाएं तरफ और धातुएं होती हैं।

जैसे:-वर्ग I A तथा VII A के तत्वों की तालिका दी गई है-

Group I & VII Character
Metallic & Non metallic Character

कारण:- आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे की ओर उतरने पर प्रत्येक नए तत्व के परमाणु में इलेक्ट्रॉन सेल(electron shell) की संख्या उपस्थित तत्वों की तुलना में एक बढ़ जाती है जिसके फलस्वरूप परमाणु के आकार में वृद्धि होती जाती है। इस कारण वैलेंस इलेक्ट्रोंस केंद्रक से दूर हो जाते हैं। इस अवस्था में बाहरी कक्ष में स्थित इलेक्ट्रॉन पर केंद्रक का नियंत्रण ढीला पड़ जाता है जिससे परमाणु सरलता पूर्वक भेलेंस इलेक्ट्रॉन(valence electron) को त्याग कर धनायन में बदल जाते हैं।

 इसी प्रकार अधातुओं(NON METAL) के परमाणु इलेक्ट्रॉन को ग्रहण नहीं कर पाते हैं क्योंकि बाहरी कक्ष(outer most shell) की दूरी अधिक हो जाने के फलस्वरूप केंद्र द्वारा दिए जाने वाले नए इलेक्ट्रॉन आकर्षित नहीं हो पाते फलस्वरुप नीचे स्थित तत्वों में विद्युत ऋणात्मक गुण कम हो जाते हैं।

 इस प्रकार यह कहा जा सकता है कि किसी वर्ग(Group) में ऊपर से नीचे की ओर उतरने पर परमाणु में इलेक्ट्रॉन को खोने की प्रवृत्ति(tendency) में वृद्धि होती है किंतु इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने की प्रवृत्ति में भी कमी होती है।

 एक आवर्त में बाएं से दाएं की ओर अर्थात वर्ग I से वर्ग VII की ओर चलने पर तत्वों के रासायनिक गुण एवं भौतिक गुण भी क्रमानुसार घटते बढ़ते जाते हैं।

उदाहरणार्थ किसी पीरियड(Period) में वर्ग I से वर्ग VII की ओर चलने पर तत्वों की विद्युत-धनात्मकता( Electro-positiveness) और धात्विक गुणों में कमी होती जाती है किंतु विद्युत-ऋणात्मकता (Electro-negativeness) और अधात्विक गुणों में वृद्धि होती जाती है। अर्थात पहले तत्वों की रसायनिक सक्रियता में क्रमशः कमी होती जाती हैं और फिर मध्य के पश्चात वृद्धि होती जाती है।

 उदाहरण के लिए हम आवर्त 3 के तत्वों को देखकर समझते हैं:- 

Period 3 Na to Cl
Chemical Reactivity

सोडियम अत्यंत सक्रिय(very reactive) तत्व है। सोडियम(Na) से सिलिकॉन(Si) तक सक्रियता(reactivity) में कमी आती है, फिर फास्फोरस (P) से क्लोरीन(Cl) तक वृद्धि होती जाती है।

किसी निर्दिष्ट वर्ग के सभी तत्वों के परमाणु में भेलेंस इलेक्ट्रॉन(valence electron) की संख्या समान होती है जिससे वे रासायनिक दृष्टि से सामान गुणों का प्रदर्शन करते हैं। फिर भी किसी वर्ग के तत्वों के रासायनिक गुणों में एक नियमित परिवर्तन देखने को मिलता है जो निम्न है:-

उदाहरण के लिए वर्ग I A क्षारीय धातु में लिथियम (Li) से फ्रेनसीएम(Fr) तक रसायनिक सक्रियता में वृद्धि होती जाती है। लिथियम(Li) से लेकर फ्रेनसीएम(Fr) तक आने में हमें ज्ञात है कि नीचे उतरने में परमाणु में इलेक्ट्रॉन को त्याग करने की प्रवृत्ति में वृद्धि होती जाती है। अतः लिथियम(Li) की तुलना में फ्रेनसीएम(Fr)का परमाणु इलेक्ट्रॉन का त्याग करने में अधिक दक्षता लिथियम की तुलना में तत्व अधिक सक्रिय है। इस वर्ग के केवल तीन तत्व लिथियम, सोडियम और पोटेशियम को लें तो हम कह सकते हैं कि लिथियम क्षारीय धातु सबसे कम सक्रिय है और पोटेशियम सबसे अधिक सक्रिय क्षारीय धातु है।

 उदाहरणार्थ वर्ग VII A के सेवन बीके हैलोजन तत्व (जो अधातु है) में फ्लोरीन(F) से आयोडीन(I) की ओर रासायनिक सक्रियता घटती जाती हैं। हमें ज्ञात है कि किसी वर्ग में ऊपर से नीचे उतरने पर तत्वों के परमाणु में इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करने की प्रवृत्ति में क्रमशः कमी आती जाती है। यही कारण है कि उनकी सक्रियता में भी क्रमशः ह्रास परिलक्षित होती है। इस प्रकार, फ्लोरीन(F), क्लोरीन(Cl), ब्रोमीन(Br) और आयोडीन(I) में से क्लोरीन(Cl) रासायनिक दृष्टि से सबसे अधिक सक्रिय(most reactive) और आयोडीन(I) सबसे कम सक्रिय तत्व (least reactive) है।

आवर्त सारणी के किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर विद्युत ऋणात्मकता(Electronegativity) में प्रायः वृद्धि होती जाती है। इसका कारण यह है कि आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु का व्यास घटता जाता है और केंद्रक का आवेश का मान बढ़ता जाता है।

आवर्त सारणी के किसी वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर विद्युत-ऋणात्मकता(Electronegativity) प्रायः घटता जाता है क्योंकि वर्ग में ऊपर से नीचे आने पर परमाणु का व्यास बढ़ता जाता है।

1. एक गैस का नाम बताओ जो सभी तत्वों में सबसे अधिक ऋणात्मक हैं।

– फ्लोरीन(Fluorine)

2. किस हैलोजन की विद्युत ऋणात्मक का सबसे कम है?

 – आयोडीन (Iodine)

3. मेंडलीफ के आवर्त सारणी के एक दूसरे में पहले आवर्त की तुलना में कितने अधिक तत्व होते हैं?

 – 6 (Six)

4. मेंडलीफ की आवर्त सारणी के आधुनिक रूप में कितने वर्ग और आवर्त हैं?

– मेंडलीफ की आवर्त सारणी के आधुनिक रूप में 9 वर्ग(Group) और 7 आवर्त(Periods) हैं।

5. किस आवर्त में दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) को रखा गया है?

 – छठे आवर्त(Period-6)

6. आवर्त में किस आवर्त में ट्रांस-यूरेनिक तत्वों(Trans-Uranic elements) को रखा गया है?

– सप्तम आवर्त(Period-7) में

7. आवर्त सारणी में सबसे बड़ा आवर्त कौन सा है और उसमें कुल कितने तत्व है?

– आवर्त सारणी में सबसे बड़ा आवर्त छठे आवर्त( Period-6 ) है और इसमें कुल 32 तत्व है।

[आवर्तो में सबसे बड़ा होने के कारण षष्ठम आवर्त (Period 6) को अति दीर्घ आवर्त(Very Long Period) या दैत्य आवर्त(Monster Period) कहा जाता है।]

8. आवर्त सारणी के आधुनिक दीर्घ रूप(Long Form) में वर्गों की संख्या कितनी है?

– 18 Groups

9. हीलियम के सबसे बाहरी कक्ष में कितने इलेक्ट्रान होते हैं ?

– दो

10. मेंडलीफ के आवर्त सारणी में कौन-सा वर्ग नहीं था और क्यों?

 – मेंडलीफ के आवर्त सारणी में शून्य (0) वर्ग नहीं था क्योंकि उस समय निष्क्रिय गैसों की खोज नहीं हुई थी।

11. जिन तत्व का बाहरी कक्ष पूर्ण होता है उन्हें क्या कहते हैं?

 – नोबल गैस(Noble Gas)

12. त्रियक सिद्धांत(Law Of Triads) का प्रतिपादन किसने किया था?

 – जे.डब्ल्यू. डोबेरीनर ने

13. किस तत्व को आवारा या दुष्ट तत्व(Rogue Element) कहा जाता है?

 – हाइड्रोजन को

14. सबसे अधिक इलेक्ट्रोपोसिटिव(Electropositive) गैर रेडियोधर्मी क्षार धातु ( non radioactive alkali metal) कौन सी है?
– सीज़ियम (Cesium/Cs)

15.  रेडियोधर्मी कौन सी क्षार धातु है?
– फ्रैंशियम (Francium/Fr)

16.  एक क्षार धातु का नाम बताओ जो 30 डिग्री सेल्सियस पर तरल है।
– सीज़ियम (Cs)

17.  कौन सी क्षारीय पृथ्वी धातु सबसे भारी है?
– रेडियम (Radium/Ra)

18. कौन सी क्षारीय पृथ्वी धातु सबसे हल्की है?
-बेरीलियम (Be)

19.  रेडियोधर्मी(Radioactive) हैलोजन (Halogen) कौन सा है?
– Astatine (At)

20.  सबसे हल्का हैलोजन (Halogen) कौन सा है?
– फ्लोरीन (F)

21. एक हैलोजन का नाम बताइए जो Reducing Property(अवकारक गुण ) बताइए।
– आयोडीन (I)

22. उस Period का उल्लेख करें जिसमें सभी तत्व रेडियोधर्मी हैं।

Period- 7

23.  एक रेडियोधर्मी noble गैस का नाम बताइए।
-रैडॉन (Ra)

24. एलक्ट्रोनगेटिविटी (Electronegativity) के घटते क्रम में F, Cl, Br और I की व्यवस्था करें।
Electronegativity का घटता क्रम:
F  > Cl > Br > I

25. एक्ट्रोपोसिटिविटी(Electropositivity) के घटते क्रम में Na, K, Rb और Cs व्यवस्थित करें।
एक्ट्रोपोसिटिविटी का घटता क्रम:
Na> K> Rb> Cs

26.. मेंडलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में अंतर बताइए।

मेंडलीफ के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में अंतर:-

 – मेंडलीफ का आवर्त नियम परमाणु द्रव्यमान(Atomic Mass) पर आधारित है जबकि आधुनिक आवर्त नियम में परमाणु संख्या(Atomic Number) को आधार माना गया है।

27.  हैलोजन को क्यों नाम दिया गया है?
– हैलोजन(Halogen)  शब्द का अर्थ है ‘समुद्री-नमक उत्पादक'(Sea-Salt Producer)। चूंकि ये तत्व समुद्री लवण में पाए जाते हैं (उदाहरण के लिए NaCl), उन्हें हैलोजेन कहा जाता है।

28. ब्रिज तत्व (Bridge Element) क्या हैं? उन्हें ऐसा क्यों कहा जाता है?
– Periodic Table(आवर्त सारणी) के समूह 0 या समूह 18 में मौजूद अक्रिय गैसों (He, Ne, Ar, Kr, Xe और Rn) को पुल तत्व(Bridge Elements) के रूप में जाना जाता है।
ये तत्व समूह 17 के मजबूत इलेक्ट्रोनगेटिव हैलोजन और अगली अवधि के समूह 1 के मजबूत (Strong) इलेक्ट्रोपोसिटिव(Electropositive) क्षार धातुओं के बीच सेतु का काम करते हैं। इसीलिए इन तत्वों को ब्रिज तत्व कहा जाता है।

29. चाकोजेन्स(Chalcogens) क्या हैं? उन्हें ऐसा क्यों कहा जाता है?
– आवर्त सारणी के समूह 16 के तत्वों अर्थात् ऑक्सीजन, सल्फर, सेलेनियम, टेल्यूरियम और पोलोनियम को सामूहिक रूप से चॉक्लेन्स के रूप में जाना जाता है।
‘चाकोजेन्स(Chalcogens)’ शब्द का अर्थ है ‘अयस्कों का उत्पादक’। अधिकांश धातुएं पृथ्वी की पपड़ी(Earth’s Crust) में उनके ऑक्साइड या सल्फाइड अयस्कों के रूप में पाई जाती हैं। इसीलिए इन तत्वों को चाकोजेन्स के रूप में जाना जाता है।

30. डोबेरिनर ट्रायड्स नियम (Dobereiner’s Law of Triads) को क्यों त्याग दिया गया?
डोबेरेन के ट्रायड्स के नियम (Dobereiner’s Law of Triads) को छोड़ दिया गया क्योंकि यह तब तक ज्ञात अधिकांश तत्वों की व्यवस्था करने में विफल रहा था और यह केवल कुछ तत्वों के लिए लागू था।

31. मेंडेलीव आवर्त सारणी के आधुनिक संस्करण (modern version of Mendeleev’s periodic table) और आवर्त सारणी के लंबे रूप(Long Form of Periodic Table)  के बीच अंतर का उल्लेख करें।

मेंडेलीव की आवर्त सारणी के आधुनिक संस्करण और आवर्त सारणी के लंबे रूप के बीच मुख्य अंतर इस प्रकार हैं: –
1. मेंडेलीव की आवर्त सारणी के आधुनिक संस्करण(modern version of Mendeleev’s periodic table) में, तत्वों को परमाणु संख्या के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है जबकि आवर्त सारणी के दीर्घ रूप(Long Form of Periodic Table) में, तत्वों को परमाणुओं के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर व्यवस्थित किया जाता है।
2. मेंडेलीव की आवर्त सारणी (modern version of Mendeleev’s periodic table) में, 7 आवर्त और 9 समूह थे और 1 – 7 में से प्रत्येक समूह को A और B उपसमूह में विभाजित किया गया था जबकि आवर्त सारणी के दीर्घ रूप (Long Form of Periodic Table) में, 7 Periods और 18 Groups हैं और कोई समूह उपसमूह(Sub Groups) में विभाजित नहीं है।

Here the following POSTS you are going to read our all Study Materials on different topics based Madhyamik Pariksha 2021:-

  1. Hindi Madhyamik 2021
  2. Madhyamik Theorems 2021
  3. Chemical Bonding |Physical Science| WBBSE CLASS 10
  4. Current Elrctricity |PHYSICAL SCIENCE WBBSE CLASS 10
  5. PERIODIC TABLE | Madhyamik Physical Science|WBBSE CLASS 10    
  6. BEHAVIOUR OF GASES| MADHYAMIK PHYSICAL SCIENCE | WBBSECLASS10

32. एक्टिनाइडस(Actinides) किसे कहते हैं?

 आवर्त सारणी में सप्तम आवर्त(Period-7)में स्थित थोरियम(Th-90) से लेकर लॉरेंशियम(Lw-103) तक के 14 रेडियो सक्रिय तत्व(Radioactive Element) को एक्टिनाइडस(Actinides) कहा जाता है।

33. लैंथेनाइड(Lanthanides) क्या है?

आवर्त सारणी में छठी आवर्त(Period-6)की लैन्थेनियम (La-57) के बाद से प्रारंभ होने वाले सीरियम (Ce-58) से लेकर ल्यूटेशियन(Lu-71) तक के 14 तत्वों को लैंथेनाइड्स(Lanthanides) कहा जाता है। ये तत्व प्रकृति में खनिज के रूप में बहुत कम मिलते हैं।

34. आवर्त सारणी के किस वर्ग में हीलियम को रखा गया है और क्यों ?

हीलियम को आवर्त सारणी के 0 वर्ग में रखा गया है। हिलियम को शून्य वर्ग में रखने का कारण यह है कि हीलियम के सबसे बाहरी कक्ष में इलेक्ट्रॉन की संख्या पूर्ण होती है। अतः हिलियम को शून्य संयोज्य(valence) कहते हैं और इसीलिए से 0 वर्ग में रखा जाता है।

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